शिक्षा के क्षेत्र का ‘इंडिया गेट’: डॉ विद्या येरावदेकर

माँ सरस्वती की कृपा इस परिवार पर हमेशा बनी रही. माता-पिता दोनों पढ़ने-पढ़ाने के पेशे में थे इसीलिए जब उनकी पहली संतान हुई तो उन्होंने उसका नाम विद्या रखा. अपने नाम को सार्थक करते हुए विद्या आज भारतीय उच्च शिक्षा का दुनिया भर में प्रचार-प्रसार कर रही हैं. हम बात कर रहे हैं सिम्बायोसिस सोसाइटी की प्रिंसिपल डायरेक्टर डॉ विद्या येरावदेकर की.

डॉ विद्या का जन्म साल 1964 में पुणे में हुआ था. इनके पिता डॉ शांताराम बलवंत मजूमदार पुणे के मशहूर सिम्बायोसिस इंटरनेशनल एजुकेशनल सेंटर के संस्थापक हैं. डॉ मजूमदार को शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य के लिए पद्मश्री और पद्म भूषण सम्मान मिल चुका है. डॉ विद्या की माँ संजीवनी मजूमदार पुणे स्थित बाबासाहब आंबेडकर मेमोरियल एंड म्यूजियम की आनरेरी डायरेक्टर हैं. विद्या को अपने घर में हमेशा पढ़ने-पढ़ाने का माहौल मिला. इन्होंने पुणे के बी जे मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस और एमडी किया है. साथ ही पुणे यूनिवर्सिटी से एलएलबी भी किया है और सिम्बायोसिस इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी से ‘इंटरनेशनलाइज़ेशन ऑफ़ हायर एजुकेशन इन इंडिया’ विषय पर पीएचडी की है.

मेडिकल कॉलेज के तीसरे ही साल में विद्या ने अपने सीनियर राजीव येरावदेकर के साथ शादी करने का फैसला किया जिनसे उनकी एक बेटी और बेटा हैं. साल 1992 में डॉ विद्या अपने पति के साथ ओमान चली गयी और यहाँ मिनिस्ट्री ऑफ़ हेल्थ से जुड़कर बतौर स्त्री रोग विशेषज्ञ साल 1997 तक अपनी सेवाएं दीं. इन्होंने भारत लौटने पर अपने पिता के सामने सिम्बायोसिस में मेडिकल हेल्थ सेंटर स्थापित करने का प्रस्ताव रखा. अपने पिता और सिम्बायोसिस के बोर्ड ऑफ़ डायरेक्टर्स को राज़ी करने के लिए इन्हें खासी मशक्कत करनी पड़ी. आखिरकार विद्या ने अपने प्रेजेंटेशन्स से उन्हें मना लिया और जून 1997 में नींव पड़ी सिम्बायोसिस सेंटर फॉर हेल्थ केयर की जिसका उद्देश्य सिम्बायोसिस के छात्रों और स्टाफ को उच्च स्वास्थ्य सेवा प्रदान करना था. साल 2000 में डॉ मजूमदार ने विद्या के सामने इंस्टिट्यूशन की जॉइंट डायरेक्टर बनने का प्रस्ताव रखा. सिम्बायोसिस में बतौर प्रिंसिपल डायरेक्टर विद्या सोसाइटी के प्रतिदिन के कामों को देख रही हैं. सिम्बायोसिस समूह के विस्तारीकरण और देश के विभिन्न राज्यों व विदेशों में सिम्बायोसिस के न्यू कैंपस स्थापित करने के लिए डॉ विद्या उत्तरदायी हैं. साथ ही सिम्बायोसिस इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी की अंतर्राष्ट्रीयकरण की प्रक्रिया का भी संचालन करती हैं.

डॉ विद्या येरावदेकर को शैक्षणिक और सामाजिक कार्यों की प्रेरणा अपने पिता से मिली है. वे पिता को अपना आदर्श मानती हैं. डॉ विद्या यूके, यूएस, थाईलैंड, मलेशिया, केन्या जैसे देशों में आयोजित एजुकेशनल फेयर्स में भाग लेती हैं और उच्च भारतीय शिक्षा को विदेशों में बढ़ावा देने के उद्देश्य से छात्रों और उनके माता-पिता से बात करती हैं. दूसरे देशों के शिक्षा मंत्रालयों से भी इनके अच्छे संपर्क हैं जिसकी वजह से डॉ विद्या उन देशों के युवाओं की ज़रूरतें भली-भांति समझती हैं.

डॉ विद्या के जीवन का उद्देश्य उच्च गुणवत्ता की शिक्षा द्वारा अंतर्राष्ट्रीय समझ को बढ़ावा देकर अपने पिता के विज़न को आगे बढ़ाना है. डॉ विद्या यूजीसी की ‘प्रमोशन ऑफ़ इंडियन हायर एजुकेशन कमिटी’ की सदस्य हैं. वे इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मास कम्युनिकेशन, इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ कॉरपोरेट अफेयर्स, स्वर्णिम गुजरात स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी, यशवंतराव चव्हाण महाराष्ट्र ओपन यूनिवर्सिटी, भारतीय विश्वविद्यालयों की एसोसिएशन की रिसर्च कमेटी (एआईयू), पब्लिक हेल्थ फाउंडेशन जैसे कई संगठनों के गवर्निंग बोर्ड की सदस्य हैं। साथ ही वे फिक्की और कन्फ़ेडरेशन ऑफ इंडिया इंडस्ट्री जैसी कॉर्पोरेट बॉडीज़ की भी सदस्य हैं. शिक्षा और स्वास्थ्य से क्षेत्र में बेहतरीन काम करने के लिए डॉ विद्या को हेल्थ एजुकेशन अवार्ड, पुणे की आशा अवार्ड, आइकॉन ऑफ़ पुणे अवार्ड जैसे कई सम्मानों से नवाज़ा जा चुका है.

शक्तिशाली नारी शक्ति के इस सर्वे में फेम इंडिया मैगजीन – एशिया पोस्ट ने नॉमिनेशन में आये 300 नामों को विभिन्न मानदंडों पर कसा , जिसमें सर्वे में सामाजिक स्थिति, प्रतिष्ठा, देश की आर्थिक व राजनीतिक व्यवस्था पर प्रभाव, छवि, उद्देश्य और प्रयास जैसे दस मानदंडों को आधार बना कर किये गये स्टेकहोल्ड सर्वे में सिम्बॉयसिस की प्रिंसिपल डायरेक्टर डॉ. विद्या येरावदेकर चौदहवें स्थान पर हैं |