महिला शिक्षा और अधिकार का सेतु: डॉ. उर्वशी साहनी

“शिक्षा बदलाव लाने का एक बहुत ताक़तवर हथियार है, लेकिन बदलाव लाने वाली शिक्षा को भी बदलना होगा.” ये कहना है स्टडी हॉल एजुकेशनल फ़ाउंडेशन की संस्थापक और सीईओ डॉ.उर्वशी साहनी का. उर्वशी पिछले 34 सालों से एक सामाजिक उद्यमी, महिला अधिकार कार्यकर्ता और शिक्षाविद् की भूमिका में हैं. वे कई शिक्षा और महिला संगठनों की संस्थापक और ऑपरेशनल हेड हैं.डॉ उर्वशी स्कूल गवर्नेंस,करिकुलम डेवलपमेंट, स्कूल रिफॉर्म, टीचर ट्रेनिंग, जेंडर इक्वलिटी पर बड़े पैमाने पर काम किया है।

डॉ. उर्वशी की एक कजिन ने शादी में दिक्कतों के चलते खुद को आग लगा ली थी. ये आत्महत्या थी या कुछ और इसका तो पता नहीं चल सका लेकिन इस घटना ने उर्वशी को अन्दर तक हिला दिया और यहीं से उनके अन्दर नारीवादी विचारधारा का जन्म हुआ. उन्होंने अपमानजनक शादी का दंश झेल रही महिलाओं के लिए साल 1983 में उत्तर प्रदेश में महिला अधिकार संस्था ‘सुरक्षा’ की नींव डाली. डॉ. उर्वशी का मानना है कि लड़कियों को अपने अधिकारों के बारे में जानना बहुत ज़रूरी है. इसके लिए ज़रूरत है कि हर लड़की शिक्षित हो तभी उनका सशक्तिकरण हो पायेगा. वे स्टडी हॉल एजुकेशनल फ़ाउंडेशन की संस्थापक और सीईओ हैं जिसके तहत उन्होंने प्रेरणा गर्ल्स स्कूल समेत तीन के-12 स्कूलों की स्थापना की है. ये फाउंडेशन शहरी स्लम की एक हज़ार लड़कियों को सस्ती उच्च स्तर की अधिकार आधारित शिक्षा देती है. शेफ(SHEF) मध्यम वर्ग के शहरी बच्चों, वंचित लड़कियों और गरीब क्षेत्रों के लड़कों और ग्रामीण बच्चों सहित 4000 से अधिक छात्रों को सीधे शिक्षा प्रदान करती है । डॉ. उर्वशी डिजिटल स्टडी हॉल की सह-संस्थापक और निदेशक भी हैं, जो उत्तर प्रदेश में ग्रामीण और शहरी विद्यालयों में संस्था द्वारा विकसित शैक्षिक प्रथाओं का प्रचार-प्रसार करती है और 1,00,000 से अधिक छात्रों और शिक्षकों तक पहुंचती है. महिलाओं को टिकाऊ आजीविका देने के उद्देश्य से डॉ. साहनी ने ‘दीदी’ की स्थापना की जहां वे 65 प्रेरणा स्नातक और उनकी मांओं को रोजगार देती हैं. वे राजस्थान के मुख्यमंत्री की सलाहकार परिषद द्वारा स्कूली शिक्षा पर बनाई गयी उप-समिति की सदस्य भी हैं।

डॉ साहनी ब्रुकिंग्स इंस्टीट्यूशन में सेंटर फॉर यूनिवर्सल एजुकेशन सेंटर में नॉन रेजिडेंट फेलो हैं। उन्हें वर्ष 2011 में अशोक फैलोशिप से सम्मानित किया गया था। साल 1994 में उनको भारत में शिक्षा सुधारने और लड़कियों के लिए शिक्षा को बढ़ावा देने के उनके प्रयासों के लिए बर्कले का हास अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार मिला. डॉ साहनी को क्लिंटन ग्लोबल इनिशिएटिव का मानद सदस्य बनने के लिए भी आमंत्रित किया गया था और अब वे हिलेरी क्लिंटन की ‘चार्ज’ की सदस्य हैं जो ये सुनिश्चित करती है कि दुनिया में ज्यादा से ज्यादा लड़कियां माध्यमिक शिक्षा पूरी करें.

यूसी बर्कले के ग्रेजुएट स्कूल ऑफ एजुकेशन से डॉ. साहनी ने शिक्षाशास्त्र में स्नातकोत्तर और पीएचडी की है। उन्होंने कोलंबिया, एनवाईयू, शिकागो और बर्कले समेत कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों और विश्वविद्यालयों में अकेडमिक पेपर प्रस्तुत किए हैं, और एडिनबर्ग, जमैका, प्लाईमाउथ, टोरंटो, उत्तरी आयरलैंड और न्यूयॉर्क में अंतर्राष्ट्रीय नाटक और शिक्षा सम्मेलनों में मुख्य वक्ता रही हैं. उन्होंने क्रिटिकल पेडागोगी, थियेटर इन एजुकेशन, फेमिनेस्ट पेडागोगी, चाइल्ड कल्चर, और गर्ल्स एजुकेशन एंड एम्पावरमेंट पर व्यापक रूप से प्रकाशित किया है। उनका वर्तमान शोध करिकुलम रिफॉर्म, टीचर ट्रेनिंग और सस्ती तकनीक की सहायता से भारत में लड़कियों के सशक्तिकरण कार्यक्रम को विकसित करने और स्केल करने पर केंद्रित है। उनकी नई किताब – रीचिंग फॉर द स्काई:एम्पावरिंग गर्ल्स थ्रू एजुकेशन, उनके प्रेरणा गर्ल्स स्कूल के साथ 14 साल के काम के अनुभव पर आधारित है. श्वाब-जुबिलांट भारतीय फाउंडेशन द्वारा उन्हें हाल ही में सोशल एंटरप्रेनर ऑफ द ईयर इंडिया, 2017 से सम्मनित किया गया है.

शक्तिशाली नारी शक्ति के इस सर्वे में फेम इंडिया मैगजीन – एशिया पोस्ट ने नॉमिनेशन में आये 300 नामों को विभिन्न मानदंडों पर कसा , जिसमें सर्वे में सामाजिक स्थिति, प्रतिष्ठा, देश की आर्थिक व राजनीतिक व्यवस्था पर प्रभाव, छवि, उद्देश्य और प्रयास जैसे दस मानदंडों को आधार बना कर किये गये स्टेकहोल्ड सर्वे में स्टडी हॉल की फाउंडर डॉ. उर्वशी साहनी पन्द्रहवें स्थान पर हैं |