मरीज़ और राजनीति दोनों की नब्ज़ और मर्ज़ से वाकिफ़: डॉ. हर्षवर्धन

भारतीय राजनीति में ऐसे नेता बहुत कम हुए हैं, जो संसद के गलियारों से लेकर राज्य की विधानसभा तक और उच्च धनाढ्य वर्ग से लेकर झुग्गी-झोपड़ियों की बस्तियों तक, सबके बीच समान रूप से लोकप्रिय हों और लोगों के दिलों को जीतने में कामयाब हुए हों। अपने संगठन ही नहीं बल्कि विपक्षी पार्टियों की नज़रों में भी ऐसा ही सम्मान अर्जित करने वाली अद्भुत शख्सियत के मालिक हैं डॉक्टर हर्षवर्धन।

दिल्ली में 1954 में जन्मे हर्षवर्धन किशोरावस्था से ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़ गये। यहीं से सामाजिक क्षेत्र में काम करने का उनका रुझान परवान चढ़ने लगा। वर्ष 1971 में दरियागंज के एंग्लो संस्कृत विक्टोरिया जुबली सीनियर सेकेंडरी स्कूल से शिक्षा पूरी करने के बाद उन्होंने कानपुर के गणेश शंकर विद्यार्थी मेमोरियल मेडिकल कॉलेज में प्रवेश ले लिया। वहां से उन्होंने 1979 में आयुर्विज्ञान तथा शल्य-चिकित्सा स्नातक की डिग्री प्राप्त की तथा इसी कॉलेज से ओटोलर्यनोलोजी में मास्टर ऑफ़ सर्जरी की उपाधि अर्जित की।

दिल्ली की राजनीति में काफी सक्रिय और लोकप्रिय होने के नाते जब दिल्ली में विधानसभा बनाया जाना तय हुआ तब यह निश्चित ही था कि डॉक्टर हर्षवर्धन भाजपा के एक प्रमुख नेता होने के नाते दिल्ली का प्रतिनिधित्व करें। 64 वर्षीय डॉ. हर्षवर्धन भाजपा के टिकट पर 1993 में कृष्णा नगर विधानसभा क्षेत्र से चुने गये और दिल्ली की पहली विधानसभा के सदस्य बने। तब से उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। वे लगातार चार बार इस क्षेत्र से विजयी रहे और 2008 में आखिरी बार यहां से विधानसभा चुनाव लड़ा। दिल्ली विधानसभा चुनाव के इतिहास में कभी न हारने का रिकॉर्ड भी डॉ. हर्षवर्धन के नाम है।

पार्टी के एक अनुभवी और सम्मानित सदस्य होने के नाते वर्ष 1993 से 1998 के दौरान वे दिल्ली में भारतीय जनता पार्टी की सरकार में स्वास्थ्य मंत्री, कानून मंत्री और शिक्षा मंत्री सहित राज्य मंत्रिमंडल में विभिन्न पदों पर आसीन रहे। 2013 का दिल्ली विधानसभा चुनाव भारतीय जनता पार्टी ने डॉ. हर्षवर्धन के नेतृत्व में ही लड़ा और कुल 66 सीटों पर अपने प्रत्याशी उतारे। पार्टी को इनमें से 31 सीटों पर विजय मिली।

दिल्ली सरकार के स्वास्थ्य मंत्रालय में कार्यरत रहने के दौरान डॉ. हर्षवर्धन ने अक्टूबर, 1994 में पोलियो उन्मूलन योजना का शुभारंभ किया। इसे खासी सफलता मिली और फिर इसे भारत सरकार द्वारा देश भर में अपनाया गया। उनकी इस दूरगामी सोच का ही नतीजा है कि आज राजधानी दिल्ली पोलियो मुक्त शहरों की सूची में शामिल है। पोलियो कार्यक्रम की सफलता पर डॉ. हर्षवर्धन को विश्व स्वास्थ्य संगठन भी सम्मानित कर चुका है। इसी उपलब्धि के लिये पूर्व अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा भी उनकी तारीफ़ कर चुके हैं।

डॉ. हर्षवर्धन ने ‘अ टेल ऑफ़ टू ड्रॉप्स’ (अंग्रेजी), कहानी दो बूंद की (हिंदी) नामक किताब भी लिखी है, जिसमें उन्होंने व्यापक पैमाने पर चलाए गये इस पोलियो उन्मूलन अभियान का पूरा खाका पेश किया है। गौरतलब है कि डॉ. हर्षवर्धन कई वर्षों से नियमित तौर पर राष्ट्रीय महत्व के मुद्दों और स्वास्थ्य विषयों पर विभिन्न समाचार पत्रों (दैनिक और साप्ताहिक पत्रिकाओं) में लेख भी लिखते रहे हैं।

स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान देने वाले डॉक्टर हर्षवर्धन ने पोलियो उन्मूलन, तंबाकू नियंत्रण, आवश्यक ड्रग नीति, अंग दान और कई अन्य स्वास्थ्य समस्याओं से संबंधित गतिविधियों में समस्याओं और उनका निदान ढूंढने में राष्ट्रीय तथा अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर काफी सक्रिय भूमिका निभाई है। वे कई वर्षों तक विश्व स्वास्थ्य संगठन के सलाहकार के रूप में भी कार्यरत रहे हैं तथा अनेक अंतर्राष्ट्रीय तकनीकी समितियों के सदस्य भी रहे हैं।

एक विशेषज्ञ के नाते उन्हें कई देशों में व्याख्यान, विचार-विमर्श और सलाहकार के नाते आमंत्रित किया गया। इनमें अमरीका, इंग्लैंड, स्वीडन, मॉरिशस, स्विट्जरलैंड, फ़िनलैंड, नेपाल, फ़िलिपींस, बांग्लादेश, म्यांमार, इंडोनेशिया, जापान, ब्राज़ील और थाईलैंड जैसे देश शामिल हैं।

कई दिग्गज नेताओं की मौजूदगी के बावजूद दिल्ली की जनता में काफी लोकप्रिय रहे डॉ. हर्षवर्धन ने 2014 में पहली बार लोकसभा का चुनाव लड़ा और जीत हासिल की। मई से नवंबर, 2014 के बीच उन्होंने केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री का दायित्व संभाला। इसके अलावा वे केंद्रीय विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं भूविज्ञान मंत्रालय का प्रभार भी संभाल रहे हैं। उनके नेतृत्व में मंत्रालयों का लक्ष्य है इंडिया इनोवेट्स, इंडिया लीड्स की चुनौती पर खरा उतरना।

पद संभालते ही उन्होंने देश के सवा सौ करोड़ से ज्यादा नागरिकों के लिये एक सस्ती और सुलभ स्वास्थ्य प्रणाली उपलब्ध कराने की रूपरेखा पेश की। गौरतलब है कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति पर वर्तमान सरकार का खास फोकस है और वह इसे देश के कोने-कोने में फैले सभी नागरिकों तक समान रूप से पहुंचाने के लिये कृतसंकल्प है।

भारत की अधिकांश जनता काफी लंबे समय से सस्ती और सुलभ स्वास्थ्य सेवाओं से वंचित रही है और स्वयं चिकित्सक होने के नाते डॉक्टर हर्षवर्धन अपने राजनीतिक कैरियर की शुरुआत से ही इसे सुधारने के लिये प्रतिबद्ध रहे हैं।

नवंबर, 2014 में उन्होंने केंद्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्री तथा भूविज्ञान मंत्री के तौर पर पदभार ग्रहण किया। वे पहले ऐसे मंत्री हैं जो मेडिकल साइंस के डॉक्टर होने के साथ-साथ देश में प्रयोगशालाओं की संख्या बढ़ाने और शोध तथा अनुसंधान को समृद्ध बनाने के बड़े मिशन को पूरा करने की ओर अग्रसर हैं। वे भारतीय वैज्ञानिक दृष्टि और शोध को दुनिया के अग्रणी देशों के समकक्ष खड़ा करने पर विशेष जोर दे रहे हैं।

डॉ. हर्षवर्धन की गिनती दिल्ली में भाजपा के अग्रणी नेताओं में होती रही है। व्यवहार कुशल, लोगों के बीच जल्दी घुलने-मिलने व नेतृत्व के नैसर्गिक गुणों के कारण वे जनता के बीच हमेशा से काफी लोकप्रिय रहे हैं। पेशे से नाक, कान और गले के रोगों के चिकित्सक डॉ. हर्षवर्धन जनता और नागरिकों की सेवा के लिये हमेशा तत्पर रहते आए हैं। वे चाहे विपक्ष में रहे हों या सरकार में, निस्वार्थ और निष्पक्ष भाव से कर्म करने में यकीन रखते हैं। जनता की सेवा और भविष्य के नये रास्तों व विकल्पों की खोज करते रहना उनकी दिनचर्या का हिस्सा है।

डॉ. हर्षवर्धन नयी टेक्नोलॉजी के विकास और इस्तेमाल के लगातार पक्षधर रहे हैं। अपने कार्यकाल के दौरान वे लगातार ऐसे कदम उठाने पर जोर दे रहे हैं। इन्हीं प्रयासों के कड़ी में नोएडा में उच्च निष्पादन कंप्यूटर( एचपीसी) प्रणाली केंद्र, कृषि मौसम विज्ञान इकाइयों के प्रयोग को बढ़ावा देना, किसानों को ज़िला स्तर पर कृषि मौसम संबंधी सलाह प्रदान करना आदि जैसे कई कदम उठाए गये हैं।

नये विचारों को बढ़ावा देने और जुटाने के लिये पांच लाख स्कूलों को जोड़ना, विभिन्न क्षेत्रों में रिसर्च को बढ़ावा देना, नैनो तकनीक और मौसम पूर्वानुमान एवं निगरानी के क्षेत्र में लगातार विकास भी ऐसे ही कुछ कदम हैं। जैव प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा शोध एवं विकास के क्षेत्र में बड़ी संख्या में अन्य संस्थानों को सहयोग करना भी एक महत्वपूर्ण योजना है।

विद्यार्थियों को विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, पृथ्वी विज्ञान और पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन के क्षेत्र में होने वाली गतिविधियों से परिचित कराने से ले कर प्रौद्योगिकी सबंधित सभी विषयों में डॉ. हर्षवर्धन की अच्छी पकड़ और रूचि उनके मातहतों के लिये भी कुछ नया करने की प्रेरणा के तौर पर काम करती है।

डॉ. हर्षवर्धन ने हाल ही में स्वीडन में आयोजित मिशन नवाचार की मंत्रीस्तरीय बैठक में भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व किया। गौरतलब है कि 23 देशों और यूरोपीय संघ के एक वैश्विक मंच मिशन नवाचार में भारत संस्थापक सदस्यों में शामिल है। नवाचार स्मार्ट ग्रिड, ऑफ़ ग्रिड और दीर्घकालिक जैविक ईंधन के क्षेत्र में सामने आ रही चुनौतियों और नये उपायों को खोजने में अग्रणी भूमिका निभा रहा है।

डॉ. हर्षवर्धन पर्यावरण और उससे जुड़े मुद्दों को लेकर भी काफी सक्रिय हैं। विश्व पर्यावरण दिवस को वे मात्र प्रतीकात्मक समारोह नहीं बल्कि एक मिशन की तरह मानते हैं। वे इस बात से काफी प्रेरणा लेते हैं कि भारतीय संस्कृति में प्रकृति के साथ तालमेल जीवन का एक अभिन्न अंग रहा है। डॉ. हर्षवर्धन द्वारा चलाया जा रहा “ग्रीन गुड डीड” अभियान इसी मुहिम का हिस्सा रहा है। पर्यावरण व वन मंत्री के नाते वे इस बात के लिये प्रयासरत हैं कि देश और दुनिया के सभी नागरिकों को पर्यावरण संरक्षण के भगीरथ प्रयासों में भागीदार बनाया जाये।

गौरतलब है कि विश्व पर्यावरण दिवस प्रत्येक वर्ष 5 जून को मनाया जाता है। पर्यावरण के लिये विशेष तौर पर जागरूक वर्तमान सरकार ही नहीं बल्कि हमेशा से ही पर्यावरण दिवस भारत के लिये विशेष महत्व रखता आया है। यह दिवस भारत के लिये विशेष महत्व रखता है। पर्यावरण से जुड़े विभिन्न संगठन तथा केंद्र और राज्य सरकारें इस दिन सतत विकास के राष्ट्रीय प्रयासों और पर्यावरण से जुड़ी चिंताओं को मुख्य धारा में लाने की कोशिश करती हैं। व्यापक पैमाने पर अभियान चला कर नागरिकों को पर्यावरण संरक्षण के लिये प्रति जागरूक किया जाता है।

विश्वव्यापी मौसमी बदलाव के दुष्प्रभावों से बचाने के लिये इस बार केंद्र सरकार ने डॉक्टर हर्षवर्धन के नेतृत्व में प्लास्टिक प्रदूषण को जड़ से मिटाने के अभियान पर जोर दिया। डॉ. हर्षवर्धन के इस संकल्प को आम जनता और स्वयंसेवी संगठनों की ओर से दिल्ली व देश के कई हिस्सों में व्यापक समर्थन मिला। इसके अलावा स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में भारत 23 देशों के मिशन इनोवेशन नेटवर्क में अग्रणी भूमिका निभा रहा है। तीन वर्षों से कम समय की अवधि में ही आर एंड डी का निवेश दुगना हो गया है

डॉ. हर्षवर्धन का दावा है कि भारतीय विज्ञान और टेक्नोलॉजी पिछले चार वर्षों के दौरान विश्व का नेतृत्व करने की दिशा में बढ़ी है। उनके अनुसार अब पानी, ऊर्जा, स्वास्थ्य, पर्यावरण, जलवायु, कृषि और खाद्यान्न के क्षेत्रों में महत्वपूर्ण चुनौतियों को हल करने के लिये विज्ञान और टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल व्यापक पैमाने पर किया जा रहा है।

डॉ. हर्षवर्धन के नेतृत्व में मंत्रालय इस दिशा में भी सक्रिय है कि साइबर भौतिक प्रणाली, आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस, सुपर कंप्यूटिंग, गहरे समुद्र, बायो फ़र्मास्यूटिकल्स के क्षेत्र में भारत विश्व स्तर पर अपनी नयी पहचान कायम करे। इसके अलावा मंत्रालय भविष्य में अन्य क्षेत्रों में भी महत्वाकांक्षी योजनाएं शुरू करने पर विचार कर रहा है।

डॉ. हर्षवर्धन का दावा है कि मौजूदा सरकार ने विज्ञान को राष्ट्रीय जरूरतों, अवसरों और प्राथमिकताओं से बेहतर तरीके से जोड़ा है। मेक इन इंडिया, स्टार्ट-अप इंडिया, डिजिटल इंडिया, स्वच्छ भारत और स्वस्थ भारत जैसी राष्ट्रीय योजनाओं में इसकी छाप स्पष्ट तौर पर देखी जा सकती है। सरकार उद्योग और शिक्षा के साथ नया और मज़बूत संपर्क बनाने पर भी बल दे रही है।

भूविज्ञान मंत्रालय अब किसानों को कृषि-मौसम विज्ञान संबंधी परामर्श उपलब्ध कराता है। किसानों को समय पर मौसम संबंधी सूचना की उपलब्धता ने कृषि कार्यकलापों में सहायता की है। इसका परिणाम राष्ट्रीय जीडीपी पर 50,000 करोड़ रुपये के एक सकारात्मक आर्थिक प्रभाव के रूप में सामने आया है। पिछले चार वर्षों के दौरान मौसम एवं समुद्र पूर्वानुमान सेवाओं की गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। मंत्रालय ने 1 जून, 2018 को संभाव्यता प्रखंड स्तर पर मौसम पूर्वानुमान लगाने के लिये दुनिया में सर्वश्रेष्ठ प्रणालियों में एक मौसम पूर्वानुमान प्रणाली आरंभ की। यह मंत्रालय द्वारा हाल में खरीदे गये 6।8 पेटा फलॉप्स की एक संयुक्त क्षमता वाले नये सुपर कंप्यूटरों प्रत्युष एवं मिहिर की कारण संभव हो पाया है ।

डॉ. हर्षवर्धन के नेतृत्व में मंत्रालय द्वारा कई अन्य उपलब्धियां भी हासिल की गयीं। डॉ. हर्षवर्धन ने 10 फ़रवरी 2017 को अंग्रेज़ी ब्रेल लिपि में ‘एटलस फ़ॉर विजुअली इंपेयर्ड (इंडिया)’ का विशेष संस्करण जारी किया। यह ब्रेल लिपि वाली एटलस विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग के तहत आने वाले राष्ट्रीय एटलस और थीम मैपिंग संगठन (एनयेटीएमओ) द्वारा तैयार की गयी है।

अप्रैल, 2017 में सर्वे ऑफ़ इंडिया की 250वीं वर्षगांठ के अवसर पर ‘‘नक्शे‘‘ पोर्टल का उद्घाटन किया गया। भारत सरकार के डिजिटल इंडिया कार्यक्रम के अनुरूप आधार रखने वाले उपयोगकर्ताओं के लिये अब प्रमाणीकरण प्रक्रिया के माध्यम से ओपन सीरीज़ मानचित्र ‘‘नक्शे‘‘ पोर्टल से पीडीएफ प्रारूप में 1:50,000 पैमाने पर डाउनलोड के लिये उपलब्ध है।

डॉ. हर्षवर्धन ने 22 सितंबर, 2017 को ‘पंडित दीन दयाल उपाध्याय विज्ञान ग्राम संकुल परिजन योजना’ का शुभारंभ किया। इस कार्यक्रम के तहत उत्तराखंड में क्लस्टर अवधारणा के जरिये सतत विकास के लिये उपयुक्त विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संबंधी कदमों पर अमल करने का प्रयास किया जायेगा।

भारत और ब्रिटेन के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रियों ने नवंबर, 2017 में विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवीनता में भारत और ब्रिटेन की भागीदारी में हुई प्रगति की भी समीक्षा की। उल्लेखनीय है कि न्यूटन-भाभा कार्यक्रम के तहत अब कार्य की प्रगति काफ़ी तेज़ हो गयी है। इसके अतिरिक्त दो-दिवसीय भारत-कनाडा प्रौद्योगिकी शिखर सम्मेलन के आयोजन के बाद दोनों देशों ने अपने द्विपक्षीय संबंधों में एक नये अध्याय की शुरुआत की।

दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण को लेकर खासे चिंतित रहने वाले डॉ. हर्षवर्धन इस बात पर बल देते हैं कि प्रदूषण से निपटना सभी की सामूहिक ज़िम्मेदारी है और इसके लिये सबका सहयोग ज़रूरी है। उनके द्वारा सुझाये गये उपायों की सभी वर्गों द्वारा सराहना की गयी।

इन उपायों में बड़े निर्माण स्थलों से निकलने वाली धूल पर कड़ी निगरानी की व्यवस्था है और किसी भी प्रकार के उल्लंघन से कड़ाई से निपटने के आदेश हैं। केंद्र सरकार मशीनों से सफाई का चलन बढ़ाने के लिये एमसीडी से हर संभव मदद लेगी। निगम के ठोस कचरा स्थलों से निकलने वाली आग से तत्कालिक तरीके से निपटने का प्रावधान किया गया है। विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग की सलाह से प्रदूषण से जल्दी निपटने के लिये नया दृष्टिकोण अपनाया जायेगा। इसके अलावा सार्वजनिक परिवहन की उपलब्धता बढ़ाने के लिये सभी उचित कदम उठाए जाने के निर्देश भी दिए गये हैं।

डॉ. हर्षवर्धन एक कर्मठ और ईमानदार छवि वाले नेता हैं और निःसंदेह पार्टी पदाधिकारियों की पसंद भी। उनकी एक बड़ी खासियत यह है कि जब भी उन्हें सरकार या संगठन में कोई दायित्व मिलता है, वे हर बार ना केवल कुछ नया करने का संकल्प लेते हैं बल्कि उस सपने को साकार करने की कोशिश में जी-जान से जुट जाते हैं।

राज्य से लेकर केंद्र तक की उनकी राजनीति का सफर भले ही एक महानगर में सिमटा हुआ लगता हो लेकिन उसने अनंत ऊंचाई की उड़ान भरी है। वे सिर्फ इंसानों ही नहीं बल्कि राजनीति के भी माहिर डॉक्टर हैं। एक ऐसे डॉक्टर, जो लोगों की राजनीतिक नब्ज़ और मर्ज़ पकड़ने में भी बराबर की महारथ रखते हैं। यही उनकी अब तक की सफलता और उपलब्धियों का मूलमंत्र भी रहा है।

” मंत्री नंबर-1 वर्ष 2018″ में फेम इंडिया ने एशिया पोस्ट के साथ मिलकर मंत्रियों की छवि, उनका प्रभाव, विभाग की समझ, लोकप्रियता, दूरदर्शिता और परिणाम जैसे कुल 10 बिंदुओं पर केंद्र सरकार के मंत्रियों का आकलन किया और उनमें उपरोक्त आकलन में डॉ. हर्षवर्धन  “सक्रिय” कैटगरी में सर्वश्रेष्ठ स्थान पर हैं.