पेट्रोल-डीज़ल के उतरते-चढ़ते भाव का ‘प्रधान’ धर्मेंद्र

पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय का चुनौतीपूर्ण दायित्व संभाल रहे धर्मेंद्र प्रधान मोदी सरकार के उन गिनेचुने मंत्रियों में शामिल हैं, जिन्हें उनके उत्कृष्ट कार्यों के लिये एक ही कार्यकाल मे राज्यमंत्री से कैबिनेट मंत्री के पद पर पदोन्नत किया गया हो। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा उन्हें जो महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंपी गयी हैं, वो इस बात की परिचायक हैं कि उन्होंने अपने कामकाज और लक्ष्य हासिल करने की क्षमता से नेत्तृत्व को कितना प्रभावित किया है उनकी इस पदोन्नति को मंत्रालय में अच्छा काम करने और निर्धारित समय में परिणाम दिखाने के लिये प्रधानमंत्री और पार्टी संगठन की ओर से दिए गये पुरस्कार के तौर पर देखा जा रहा है। 

मूल रूप से ओडिशा के रहने वाले धर्मेंद्र प्रधान मोदी सरकार की सबसे महत्वाकांक्षी  योजनाओं में से एकउज्ज्वला योजनाके प्रमुख सूत्रधार हैं उज्ज्वला योजना के तहत निर्धन परिवारों को सस्ते दामों पर रसोई गैस उपलब्ध कराने का उद्देश्य रखा गया है इसे देश के दूरदराज के इलाकों में मौजूद करोड़ों निर्धन परिवारों तक पहुंचाया गया है और यह स्वास्थ्य तथा पर्यावरण को सुरक्षित रखने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। 

गौरतलब है कि आम लोगों को गैस सब्सिडी छोड़ने के लिये प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से चलायी गयी उनकीगिव इट अपयोजना को सभी राजनीतिक दलों और वर्गों के लोगों ने सराहा इस योजना को पूरी पारदर्शिता और जवाबदेही के साथ जमीनी स्तर पर पहुंचाने में प्रधान ने खूब मेहनत की काम और लक्ष्य के प्रति उनकी निष्ठाऔर गंभीरता को देखते हुए उन्हें सितंबर 2017 में कैबिनेट मंत्री का दर्जा दिया गया 

धर्मेंद्र प्रधान की क्षमताओं और काबिलियत पर नरेंद्र मोदी को कितना भरोसा है, इसका सबसे बड़ा सबूत यह है कि वर्तमान सरकार द्वारा नये बनाये गये कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय का जिम्मा उन्हें सौंपा गया हैयह भारत की वर्तमान 60 प्रतिशत से अधिक युवा आबादी को रोजगार के नये अवसर मुहैया कराने के लिये उठाया गया एक महत्वाकांक्षी अभियान है

2014 में नये बने इस मंत्रालय के तहत प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना 2015 में शुरू हुई और पिछले दो साल में लगभग 27 लाख लोगों को प्रशिक्षण दिया जा चुका है 2020 तक इसका लक्ष्य एक करोड़ लोगों को प्रशिक्षण देने का है ऐसे प्रधानमंत्री कौशल केंद्र देश के हर जिले में खोलने की योजना है अब तक डेढ़ सौ केंद्रों की स्थापना की जा चुकी है इसके तहत औद्योगिक  प्रशिक्षण संस्थानों को भी बढ़ावा दिया जा रहा है और लगभग 14 सौ केंद्रों की शुरुआत की जा चुकी है  

धर्मेंद्र प्रधान 1983 में अपने छात्र जीवन के दौरान ही भाजपा के संगठन अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ए॰बी॰वी॰पी॰) से सक्रियता से जुड़ गये  थे। 1985 में वे तालचेर कॉलेज छात्र संघ के अध्यक्ष निर्वाचित हुए। इसके बाद धर्मेंद्र प्रधान 1995 में छात्र संगठन में बतौर सचिव और वर्ष 2002 में राष्ट्रीय सचिव की भूमिका निभा चुके हैं। 

2013 में उड़ीसा सिटीजन सम्मान से नवाजे गये धर्मेंद्र प्रधान युवाओं, किसानों और पिछड़ी जनजातियों की समस्याओं को सुलझाने में विशेष रुचि लेते रहे हैं उनके द्वारा किए गये कार्य की ना केवल राज्य बल्कि देश स्तरपर भी काफी सराहना हुई है

अपने राजनीतिक करियर के शुरुआती दौर में वे राज्य में छात्र और युवा अभियानों में सक्रिय रूप से जुड़े रहे  इसी दौर में उनकी काबलियत को देखते हुए पार्टी ने उन्हें भारतीय जनता युवा मोर्चा (बी॰जे॰वाई॰एम) के राष्ट्रीय अध्यक्ष की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी। बी॰जे॰वाई॰एम॰ के राष्ट्रीय अध्यक्ष रहते हुए उनके नेतृत्व में धर्म आधारित आरक्षण के विरोध अन्य संबंधित मुद्दों पर सफलतापूर्वक अभियान चलाया गया। ओडिशा की पल्ललहारा विधानसभा सीट से वे पहली बार विधान सभा में चुने गये विधायक बनने के बाद से वे सक्रिय राजनीति में ऐसे रचेबसे कि केंद्र में पार्टी केंद्र सरकार के अहम चेहरे के तौर पर स्थापित होते चले गये। 

2012 से 2018 तक धर्मेंद्र प्रधान बिहार से भाजपा के राज्यसभा सांसद रहे हैं फिलहाल मार्च, 2018 से वे मध्यप्रदेश से राज्यसभा के सदस्य हैं वैसे धर्मेंद्र प्रधान एक बार लोकसभा सांसद भी रह चुके हैं। वे अपने गृह राज्य ओडिशा की देवगढ़ सीट से 14वीं लोकसभा में सांसद चुने गये थे। 

इसके पूर्व उन्होंने अपने निर्वाचन क्षेत्र में एक ईमानदार छवि वाले नेता और ऊर्जावान युवा सामाजिक कार्यकर्ता के तौर पर बहुत कम समय में ख्याति अर्जित की। यहां तक कि राजनैतिक मतभेदों के बावजूद विरोधी दलों के कई नेता उनकी व्यवहारकुशलता मानवीय गुणों से प्रभावित हैं। यह उनकी बेदाग छवि और कर्मठ व्यक्तित्व की छाप का जीताजागता सबूत है 

26 जून 1969 को जन्मे धर्मेंद्र प्रधान को राजनीति विरासत में मिली।  उनके पिता देबेंद्र प्रधान भी देवगढ़ लोकसभा सीट से सांसद रह चुके हैं। उनके पिता अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में मंत्री थे। माताजी का नाम बंसत मंजरी प्रधान है उनका विवाह 9 दिसंबर, 1998 में मृदुला प्रधान से हुआ। उनका एक बेटा और बेटी है।

युवावस्था से ही राजनैतिक परिपक्वता के धनी धर्मेंद्र प्रधान सांगठनिक मामलों के साथ ही कई कठिन प्रदेशों के चुनाव प्रभारी रहे हैं। वर्ष 2004 में त्रिपुरा और फिर 2008 में उन्हें छत्तीसगढ़ का प्रभारी बनाया गया वर्ष 2010 में पार्टी द्वारा बिहार राज्य संगठन चुनाव प्रभारी बनाये गये कर्नाटक, उत्तराखंड, झारखंड और ओडिशा में भी उन्हें पार्टी से सम्बंधित महत्वपूर्ण कार्य सौंपे गये 2012 में उत्तराखंड विधानसभा चुनावों में भारी गुटबाज़ी के बावजूद पार्टी को कांग्रेस के साथ कड़े मुकाबले में लाने का भी काफ़ी कुछ श्रेय उन्हें ही हासिल हुआ था। 

पार्टी महासचिव के तौर पर उनका सबसे सबसे बड़ा गुण यह रहा है कि ज़मीनी स्तर पर सामाजिक समीकरणों को समझने उसी हिसाब से चुनावी रणनीति को तैयार करवाने का उन्हें गहरा अनुभव है। राज्यों में विभिन्न गुटों धड़ों के बीच ठोस तालमेल बनाकर पार्टी की चुनावी मशीनरी को दुरुस्त करना, कार्यकर्ताओं और स्वयं को बूथप्र बंधन में झोंक डालने के साथ ही जनता के बीच पार्टी की रीति, नीति और सिद्धांतों को पहुंचाने के लियेकार्यकर्ताओं को प्रशिक्षण दिलाने की कला में वे माहिर माने जाते हैं। 

पार्टी के भीतर के कई नाज़ुक आंतरिक मामलों को सुलझाने की युक्ति तलाशने के लिये उनकी सेवाएं ली जाती हैं। 2014 के लोकसभा चुनावों में बिहार में भाजपा की रणनीति बनाने और एनडीए गठबंधन की भारी जीत के लिये भी उन्हें खूब श्रेय दिया गया। 

ओडिशा के तालचेर कॉलेज से मानव शास्त्र विषय पर एम.ए. करने वाले धर्मेंद्र प्रधान को उत्कृष्ट विधायक पुरस्कार से नवाजा जा चुका है वर्ष 2002-2003 में उन्हें गोपबंधु प्रतिभा सम्मान भी मिला वे पहली बार 2012 में बिहार से राज्यसभा के लिये निर्वाचित हुए। सांसद होने के नाते वे कई ससंदीय समितियों के सदस्य भी रहे हैं जैसे कि –  सरकारी आश्वासनों संबंधी समिति, टेलिकॉम लाइसेंसों और स्पेक्ट्रम के आवंटन और मूल्य निर्धारण सेसंबंधित मामलों की जांच के लिये गठित संयुक्त संसदीय समिति और मई से अगस्त तक 2012 में ग्रामीण विकास संबंधी समिति, कृषि संबंधी समिति। 

उन्हें अंतर्राष्ट्रीय स्तर की कई बैठकों में भाग लेने देश के कई उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडलों का नेतृत्व करने का भी अवसर मिला। इनमें से ख़ास उपलब्धियों वाली कुछ विदेश यात्राओं का जिक्र किया जाये तो उनमें 2004 में विश्व व्यापार संगठन की बैठक में शामिल होने के लिये ब्रसेल्स (बेल्जियम) का दौरा उनकी पहली महत्वपूर्ण विदेश यात्रा रही 

2005 में वे इंटरनेशनल विजिटर्स प्रोग्राम में सम्मिलित होने के लिये अमरीका गये। वर्ष 2006 में धर्मेंद्र प्रधान यूरोपियन और एशियन जॉइंट  पार्लियामेंटेरियन्स कन्वेंशन फॉर कैंपेन अगेंस्ट एचआईवी से संबंधित सम्मेलन में सम्मिलित होने के लिये रूस यात्रा पर गये। इसके अलावा उन्होंने 2007 में अमरीका में इंडियायेल पार्लियामेंटरीलीडरशिप प्रोग्राम में भी शिरकत की वर्ष 2011 में भी उन्होंने अमरीका में भारतीय जनता पार्टी और इंटरनेशनल रिपब्लिकन इंस्टिट्यूट के बीच विनिमय पहल में हिस्सा लिया।

 केंद्र में भाजपा की सरकार बनने के बाद उन्होंने जून, 2014 में मास्को (रूस) में 21वीं विश्व पेट्रोलियम कांग्रेस में भाग लिया। इसके अलावा उन्होंने राष्ट्रपति के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल के सदस्य के रूप में उसी वर्ष वियतनाम की यात्रा की रियाद (सऊदी अरब) में 2014 में पेट्रोलियम मंत्रालय के अधिकारियों एवं सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों के प्रमुखों के साथ बातचीत के लिये भी  उन्होंने ही प्रतिनिधिमंडल का प्रतिनिधित्व किया। 

अश्गाबात (तुर्कमेनिस्तान)  में उन्होंने तापी प्राकृतिक गैस पाइपलाइन परियोजना की 19वीं संचालन समिति औ रपाकिस्तान में इस्लामाबाद में आयोजित 20 वीं बैठक में भी भाग लिया तापी परियोजना में जो चार देश शामिल है, वे हैंतुर्कमेनिस्तान, अफ़गानिस्तान, पाकिस्तान और भारत(TAPI) इसके अलावा उन्होंने मोज़ाम्बिक, मेक्सिको, कोलंबिया, नाइजीरिया, ऑस्ट्रिया, रूस, ईरान, इराक, कुवैत, बहरीन, अंगोला, यूएई तथा  वैंकूवर में भी भारतीय प्रतिनिधिमंडल की अगुवाई की

केंद्र सरकार के चार साल पूरे होने के आसपास के समय के दौरान लगातार तेल और पेट्रोल की कीमतों पर बहस छिड़ी हुई रही इस मामले पर धर्मेंद्र प्रधान का मानना है कि इसे जितना जल्दी जीएसटी के दायरे में लाया जाये, उतना बेहतर स्थिति हो सकती है क्योंकि इस पर लगातार विपक्ष को केंद्र सरकार पर निशाना साधने का मौका मिल रहा है। 

गौरतलब है कि तेल कीमतों में कमी की मांग को लेकर मोदी सरकार भाजपा काफी दबाव में है। इसे जीएसटीके दायरे में लाने के बाद कीमतें देश भर में ना केवल कम होंगी बल्कि एक समान रहेंगी। कई तरह की आलोचनाओं बाध्यताओं के बीच वे इस मामले पर केंद्र सरकार के सामने रही दिक्कतों को आम जनता मेंसहजता से पेश करने की कोशिश कर रहे हैं 

पेट्रोल और डीजल की रोज बदलती कीमतों की एक बहुत बड़ी वजह केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा उस पर लगाये जा रहे विभिन्न टैक्स की अलगअलग दरें हैं जीएसटी लागू होने के बाद पूरे देश में कीमतें समान हो जायेंगी। इसके अलावा कई अन्य कारण भी तेल की कीमतों पर असर डालते हैं 

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर क्रूड ऑयल के दाम रोज घटनेबढ़ने के अलावा डॉलर और रूपए के बीच के संबंध में उतारचढ़ाव के अलावा तेल उत्पादक देशों द्वारा अपना प्रोडक्शन घटाना, ईरानयूएस प्रतिबंध और वेनेजुएला में अस्थिरता  भी तेल की कीमतों को प्रभावित कर रहे हैं

रसोई गैस को पाईपलाइन के ज़रिए घरघर पहुंचाने की सरकारी मुहिम को लेकर उन्होंने यह विश्वास व्यक्त किया है कि अगले तीन वर्षों में उत्तर प्रदेश के आधे से अधिक इलाकों में ‘’ऊर्जा गंगा योजना’’ के तहत पाईप गैसकनेक्शनों का जाल बिछ जायेगा। इस योजना से पूर्वी उत्तर भारत की अर्थ क्रांति में नई ऊर्जा आएगी। 

वाराणसी के अलावा उत्तर प्रदेश में लखनऊ, इलाहाबाद, बरेली, कानपुर, मेरठ, आगरा में घरघर गैस पहुंचाने की प्रक्रिया इन दिनों जारी है। बनारस में 37 किलोमीटर पाइप लाइन बिछाई गयी है। अब तक कई व्यावसायिक संस्थानों, होटलों, ढाबों, मेस समेत 5500 घरों में कनेक्शन दिये जा चुके हैं। दो सीएनजी स्टेशन तैयार हैं। अगले एक साल में 50 हज़ार घरों तक पाइपलाइन पहुंचाने का लक्ष्य है। इसकी आपूर्ति सुचारु रखने के लिये 10 सीएनजी स्टेशन और लगाये जायेंगे।  

सरकार और मंत्रालय पूरी तरह सुनिश्चित कर रहे हैं कि पेट्रोलियम की कीमतों को लेकर गरीब और  मध्यम वर्ग को  परेशानियों का सामना ना करना पड़े सरकार स्थिति से निपटने के लिये समग्र रुख अपनाएगी ताकि पेट्रोलियम की कीमतें देश के नागरिकों की रोजमर्रा की जिंदगी को तकलीफदेह ना बनायें। इसके लिये सरकार हर संभव कदम उठाने के लिये प्रयासरत है और सभी मुद्दों या आयामों पर गंभीरता से विचार कर रही है

अपनी सरकार की मुद्रा योजना को कौशल विकास से सम्बद्ध करने की योजना को लेकर भी वे काफी उत्साहितहैं। मोदी सरकार के चार साल पूरे होने पर उन्होंने भरोसा जताया है कि मुद्रा योजना के तहत 2018 की जुलाई से सितंबर की तिमाही में एक लाख युवा लक्षित स्वरोजगार हासिल करेंगे

प्राकृतिक गैस को भविष्य का ईंधन मानने वाले धर्मेंद्र प्रधान के अनुसार मोदी सरकार के सत्ता में आने के बाद सीजीडी नेटवर्क के कवरेज को दोगुना कर इसे 130 ज़िलों में फैले 94 भौगोलिक क्षेत्रों तक विस्तारित कर दिया है।भारत के प्राथमिक ऊर्जा बास्केट में गैस के हिस्से को वर्तमान 6.5 प्रतिशत से बढ़ाकर 15 प्रतिशत तक कर दिया जायेगा। योजना का यह दौर पूरा होने के बाद देश की आबादी का लगभग 50 प्रतिशत क्षेत्र  (61 करोड़ नागरिक ) सीजीडी कवरेज के दायरे में होगा।

धर्मेंद्र प्रधान इस बात के पक्षधर हैं कि सरकार की अधिकाधिक योजनाओं को रोज़गारमूलक बनाया जाये। वे इसबात पर भी ज़ोर देते हैं कि कौशल आधारित शिक्षा, पुनर्वास, विस्थापन, पिछड़ा वर्ग, खेती से जुड़ी समस्याओं और युवाओं से संबंधित विभिन्न मुद्दों  पर  गंभीरता से काम करने की जरूरत है।  

धर्मेंद्र प्रधान ने युवाओं को राजनीति में लाने और उन्हें एक  अच्छे और सच्चे नेता के गुणों से परिचय कराने में  अपने संगठन के लिये काफी महत्वपूर्ण भूमिका निभायी है उनमें  देश और दुनिया की जानकारियां जुटाने की जिज्ञासा  हमेशा से रही है और इस वजह से उनका काफी समय अध्ययन में भी जाता है। इतिहास और राजनीति उनके पसंदीदा विषय हैं और बेहद व्यस्तता के बीच भी समय निकालकर इन विषयों पर अपनी जानकारी और ज्ञान में इजाफा करते रहते हैं।

पेट्रोलियम मंत्री के तौर पर बेहतरीन काम करने वाले धर्मेंद्र प्रधान का वर्तमान सबसे बड़ा लक्ष्य है प्रधानमं त्रीउज्जवला योजना का लाभ 8 करोड़ आबादी तक पहुंचाना। उनकी प्राथमिकता पिछड़े राज्यों, दूरदराज के इलाकों, अनुसूचित जातियों और जनजातियों आदिवासी परिवारों की शतप्रतिशत आबादी तक इस योजना का लाभ पहुंचाना है।

धर्मेंद्र प्रधान नौजवानों, छात्रों बेरोज़गारों की समस्याओं को लेकर बहुत संवेदनशील है देश के किसी भी कोने में दौरा करते समय वे युवा कार्यकर्ताओं और छात्रों से मिलने को लेकर व्याकुल दिखते हैं धर्मेंद्र प्रधान ना केवल खुद प्रतिभा और ऊर्जा का बेजोड़ संगम है बल्कि वो भारत की युवा शक्ति को भी इतना सक्षम बनाना चाहते हैं कि यह युवा शक्ति भारत को विश्व महाशक्ति बनाने में महत्वपूर्ण सूत्रधार साबित होने की चुनौती पर खरे उतरें। 

” मंत्री नंबर-1 वर्ष 2018″ में फेम इंडिया ने एशिया पोस्ट के साथ मिलकर मंत्रियों की छवि, उनका प्रभाव, विभाग की समझ, लोकप्रियता, दूरदर्शिता और परिणाम जैसे कुल 10 बिंदुओं पर केंद्र सरकार के मंत्रियों का आकलन किया और उनमें उपरोक्त आकलन में धर्मेंद्र प्रधान “सरोकार” कैटगरी में सर्वश्रेष्ठ स्थान पर हैं.