प्रोग्रेसिव ब्यूरोक्रेसी की जीती-जागती मिसाल हैं देश दीपक वर्मा

Buearucracy , Desh Deepak Verma

1978 बैच के यूपी कैडर के आईएएस अधिकारी रहे देश दीपक वर्मा की पहचान हमेशा से एक लगनशील, दूरदर्शी और उत्साही अधिकारी की रही है। 2013 में देश के पार्लियामेंट्री सेक्रेटरी पद से सेवानिवृत हुए श्री वर्मा को उत्तर प्रदेश में विद्युत रेग्युलेटरी अथॉरिटी का अध्यक्ष बनाया गया था। 1 सितम्बर, 2017 को उन्होंने राज्य सभा के महासचिव का पदभार संभाला है। उनका दर्जा कैबिनेट सेक्रेटरी के समकक्ष है।

गोरखपुर के मूल निवासी और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से भौतिकी में एमएससी व ऑस्ट्रेलिया से अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार में एमबीए की उपाधि प्राप्त देश दीपक वर्मा स्कूल के दिनों से ही एक मेधावी छात्र रहे हैं। उनकी रुचि वाद-विवाद प्रतियेगिताओं मे भागीदारी, अभिनय और खेल-कूद में उनकी गहकी रुचि रही। अपने छात्र जीवन में उन्होंने इन्टर-स्कूल, युनिवर्सिटी और स्टेट स्तर पर आयोजित वाद-विवाद और निबंध प्रतियोगिताओं में अनेकों पुरस्कार प्राप्त किये थे। आईएएस की परीक्षा में उच्च स्थान पाने पर होम स्टेट यानी यूपी कैडर मिला।

अपने सेवा-काल में देश दीपक वर्मा उत्तर प्रदेश राज्य सरकार के कई अहम पदों पर आसीन रहे। वे प्रदेश के चार महत्वपूर्ण जिलों अल्मोड़ा, अलीगढ़, बरेली और आगरा के जिला मजिस्ट्रेट रहे और बाद में इलाहाबाद और लखनऊ मंडलों के मंडल आयुक्त के रूप में नियुक्त हुए। इस प्रकार, वह उत्तर प्रदेश के शीर्ष दस सर्वाधिक संवेदनशील जिलों में से पांच जिलों में जिला मजिस्ट्रेट/आयुक्त के पद पर रहे जो कि नि:संदेह किसी भी अधिकारी के लिए एक अप्रतिम उपलब्धि है। लखनऊ के आयुक्त के रूप में लखनऊ में 20 वर्षों से अधिक समय से चल रहे शिया-सुन्नी विवाद को निपटाने में अपने उत्कृष्ट योगदान के लिए उन्हें गणतंत्र दिवस की परेड के दौरान सम्मानित किया गया। वे वाणिज्यिक कर, पंजीकरण, परिवहन, सहकारी और पर्यटन जैसे महत्वपूर्ण विभागों में प्रमुख सचिव रहे। इसके साथ ही उन्हें व्यापार कर विभाग में विवरणियों की ई-फाइलिंग की व्यवस्था करने, सीमाओं पर मौजूद नाकों (चेक पोस्ट) को समाप्त करने, ई-रिफंड की प्रणाली आरम्भ करने आदि जैसे अनेक सुधारों को लागू करने का श्रेय भी प्राप्त है। प्रमुख सचिव (परिवहन) के रूप में, उन्होंने उत्तर प्रदेश में वातानुकूलित वॉल्वो बसों की शुरूआत की और अनलेडड पेट्रोल के उपयोग का भी सूत्रपात किया।

भारत सरकार के स्तर पर, उन्हें पर्यावरण और वन मंत्रालय में संयुक्त सचिव; उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्रालय में अपर सचिव और वित्तीय सलाहकार; भारतीय खेल प्राधिकरण में महानिदेशक तथा संसदीय कार्य मंत्रालय में सचिव, भारत सरकार जैसे अति प्रतिष्ठित पदों पर कार्य करने का अवसर प्राप्त हुआ। संसदीय कार्य मंत्रालय में सचिव के रूप में उन्होंने मंत्रालय की कार्यप्रणाली में अनेक सुधार किये।

देश दीपक वर्मा को कई संयुक्त राष्ट्र कन्वेंशन्स – जैसे कन्वेंशन्स ऑन बायोलॉजिकल डाइवर्सिटी (सीबीडी), यूएन कन्वेंशन टू कॉम्बैट डेजर्टीफिकेशन (यूएनसीसीडी), यूएन फ्रेमवर्क कन्वेंशन ऑन क्लाइमेट चेंज (यूएनएफसीसी), कार्टाजिना प्रोटोकॉल ऑन बायो-सेफ्टी आदि- में भारत का प्रतिनिधित्व करने का गौरव प्राप्त है। उन्होंने हेग (2002), मॉन्ट्रियल (2003), ग्रेनाडा, स्पेन (2006), क्यूरिटिबा, ब्राजील (2006) में संयुक्त राष्ट्र कन्वेन्शन्स बैठकों में अंर्तराष्ट्रीय समूहों की अध्यक्षता की है। उत्तर-प्रदेश विद्युत नियामक आयोग (यूपीईआरसी) लखनऊ के अध्यक्ष के रूप में अपने कार्य-काल के दौरान उन्होंने ऊर्जा क्षेत्र में अनेक महत्त्वपूर्ण सुधारों का सूत्रपात किया। वे अपने अनेक ऐतिहासिक न्यायिक निर्णयों के माध्यम से विद्युत की खरीद में आने वाली लागत में कमी करने और विद्युत की खरीद-प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने में सफल रहे। उनके द्वारा लाये गये विद्युत डिमांड साइट मैनेजमेंट (डीएसएम) एक्सचेंज, मिनी ग्रिड और माइक्रो ग्रिड एक्सचेंज, रिन्युएबल ऊर्जा उत्पादन संबंधी विनियमों आदि जैसे अनेक नये महत्त्वपूर्ण विनियमों की ऊर्जा जगत में अत्यधिक सराहना की गयी। उन्होंने विभिन्न विषयों पर, विशेषकर पर्यावरण से संबंधित विषयों पर अनेक लेख एंव पुस्तकें भी लिखी हैं।

संगीत, काव्य-रचना, बैडमिंटन और गोल्फ में रुचि रखने वाले देश दीपक वर्मा को मार्च, 2017 में भारी बहुमत से लखनऊ गोल्फ क्लब का अध्यक्ष चुना गया था। वे प्रौढ़-साक्षरता, समाज में शारीरिक और मानसिक रूप से नि:शक्त वर्गों के उत्थान, महिलाओं के सशक्तिकरण और कला एवं संस्कृति को बढ़ावा देने वाली अनेक नागरिक संस्थाओं द्वारा की जा रही पहलों को समर्थन एंव सहयोग प्रदान करते रहे हैं। फेम इंडिया एशिया-पोस्ट ने अपने ताजा सर्वे में उन्हें देश के प्रमुख प्रभावशाली नीति निर्माताओं में से पाया है।