दबे-कुचले का काम ही राजू तिवारी की दिनचर्या

आज के दौर में बिना किसी सियासी प्लेटफार्म के राजनीति करना बड़े प्रयोग का नमूना है। उत्तरी बिहार स्थित पूर्वी चंपारन जिले में यह सामाजिक प्रयोग करने वाले हैं गोविंदगंज असेंबली सीट से युवा विधायक राजू तिवारी। सचमुच राजू तिवारी क्षेत्र के लिए इतना कुछ कर गए, जिसकी लोगों को उम्मीद नहीं रही। अपनी प्रारंभिक शिक्षा गोरखपुर के बेसिक प्राइमरी पाठशाला सगोरा से करने के बाद उन्होंने गोरखपुर विश्वविद्यालय से दर्शन में एम.ए.किया।

एक साधारण युवा की तरह भी उन्होंने सहारा एयरलाइंस में करीब ढाई वर्ष तक नौकरी की, लेकिन अपनों की बेहतरी के लिए काम करने में राजू का मन रमता था। लिहाजा सहारा की मोटी पगार वाली नौकरी से राजू ने कर लिया। इस तरह वे1999 से राजनीति में सक्रिय हुए, वह भी एक निर्दलीय राजनीतिक कार्यकर्ता की तरह। पूर्वी चंपारण के लोगों के दिल को यही बात छू गई। लगातार तीन साल तक लोगों की मदद करने वाली राजनीति से जुड़े रहे। समय के साथ राजू तिवारी की शोहरत काफी ऊंचाई तक पहुंच गई और वर्ष 2002 में लोक जनशक्ति पार्टी के मंच से सक्रिय हो गए। करीब आठ साल बाद पार्टी ने उन्हें गोविंदगंज सीट से अपना उम्मीदवार बनाया, मगर राजू को पराजय का सामना करना पड़ा। 2015 में एक बार फिर राजू चुनाव मैदान में उतरे तो रिकॉर्ड मतों जीत हासिल की।

जनता की उम्मीद पर खरा उतरना ही राजू तिवारी की राजनीति है। परंपरावादी नेताओं से अलग सोच रखने वाले राजू तिवारी देश में मौजूद आर्थिक चुनौतियों और बेरोजगारी को मिटाना चाहते हैं। इनकी सर्वोच्च प्राथमिकता है युवाओं को शिक्षा और हुनर के अनुसार रोजगार दिलाना। एक एयरलाइंस कंपनी में शानो-शौकत का जीवन जीने वाले इस युवा मन मेंभीतर तक घर किए समाज सेवा के भाव आज लोकप्रिय नेता बना दिया। समाज के दबे-कुचले लोगों के लिए काम करना राजू तिवारी की दिनचर्या बन गई है। फेम इंडिया एशिया पोस्ट ने अपने ताजा सर्वे में उन्हें बिहार के 40 प्रतिभाशाली युवाओं में पाया है।