संघर्ष और जुझारुपन के दम पर आगे बढते कदम

युवाओं के नकारात्मक शक्ति से सकारात्मकता की ओर मोड़ना कुमार आशीष का राजनीति में आने का मूल मंत्र है। इस प्रयास में समाज के हर वर्ग का सहयोग ले रहे हैं।

 कुमार आशीष की प्रारंभिक शिक्षा दीक्षा पटना की प्रतिष्ठित स्कूल लोयला से हुई है। मगध विश्वविद्यालय में अपनी पढ़ाई पूरी करते हुए छात्र राजनीति में अपनी अलग पहचान बनाई। 1995 में एनएसयूआई के माध्यम से कांग्रेस की सदस्यता ली और इसी वर्ष मगध विश्वविद्यालय के एनएसयूआई के अध्यक्ष की कमान भी संभाली। यूथ कांग्रेस के अध्यक्ष के तौर पर बेहतरीन कार्य किया। 1995-96 में निजी स्कूल और कोचिंग के खिलाफ बड़ा आंदोलन का नेतृत्व किया। यूथ कांग्रेस के अपने पांच साल के कार्यकाल में इन्होंने आम आदमी के मुद्दे को उठाया जिसमें जनता का पूर्ण सहयोग मिला। प्रदेश कांग्रेस में कई महत्वपूर्ण पदों पर अपनी जिम्मेवारी से पहचान बनाई है। कुमार आशीष प्रदेश कांग्रेस कमेटी में प्रवक्ता, सचिव के अलावे मगध विश्वविद्यालय में सिनेटर भी रह चुके हैं। इनकी लोकप्रियता को देखते हुए पटना के बांकीपुर विधानसभा का उम्मीदवार भी कांग्रेस ने बनाया। कुमार आशीष अपने संघर्ष व जुझारुपन के दम पर राजधानी पटना से औरंगाबाद के देव तक लगभग 282 किलोमीटर की पदयात्रा की। इस दौरान प्रदेश के युवाओं की समस्या को हल करने के लिए सरकार से गुहार भी लगाई। युवाओं को जो शक्ति व अधिकार मिलना चाहिए वह पूर्ण नहीं किया जा सका है। कांग्रेस के कर्मठ सिपाही के रूप में कार्य कर रहे कुमार आशीष की पूरी कोशिश है कि युवाओं की पूरी शक्ति मिले, जिससे कि उनको राजनीति में हिस्सेदारी मिल सके। फेम इंडिया-एशिया पोस्ट सर्वे में बिहार के 40 प्रभावशाली युवाओं की सूची में प्रयत्नशील कैटगरी में सर्वश्रेष्ठ पायदान पर हैं।