संघर्ष की कोख से निकले हैं चेतन आनंद

विरासत को संभालने वाला जब योग्य हो, तो माता-पिता को जहां खुशी मिलती है, वहीं उस समाज और क्षेत्र के लोग स्वयं को सुरक्षित महसूस करते हैं। युवा क्षत्रप चेतन आनंद किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं, इनके माता-पिता दोनों पूर्व सांसद रह चुके हैं। इनकी माता श्रीमती लवली आनंद और पिता आनंद मोहन हैं। जब इनका जन्म हुआ उस वक्त बिहार में राजनीतिक लड़ाई अगड़ों और पिछड़ों के बीच चरम पर थी, जिसका खामियाजा इन्हें अपने जन्मकाल में भुगतना पड़ा।

बिहार के राजनीतिक माहौल को देखते हुए पिता आनंद मोहन सिंह ने इन्हें प्रारंभिक शिक्षा के लिए देहरादून के वेलहम ब्यॉज स्कूल में नामांकन कराया, यहां से 12 वीं तक की पढ़ाई करने के बाद स्नातक कम्यूनिकेशंस एण्ड ग्राफिक्स डिजायनर सीम्बोसिस स्कूल ऑफ डिजायन पुणे से किया। पेंटिंग और शूटिंग के शौकिन चेतन को उत्तराखंड के तत्कालीन राज्यपाल रहीं श्रीमती मार्गेट अल्वा पुरस्कृत कर चुकी हैं। शूटिंग का प्रशिक्षण इन्होंने देश के महान निशानेबाज जसपाल राणा के पिता द्वारा संचालित प्रशिक्षण संस्थान से प्राप्त किया। राजनीति में आने का मुख्य उद्देश्य पिता आनंद मोहन सिंह को जिस साजिस के तहत फसाया गया है, उन्हें न्याय दिलाने के लिए राजनीति में कदम रखा।

“मेरी विरासत संघर्षवाद की है, वंशवाद की नहीं” का उदघोष करने वाले चेतन अपने समाज में नवचेतना का संचार कर रहे हैं। शोषण, विषमता और जुल्म के खिलाफ अपनी लड़ाई को जारी रखना ही राजनीति का मुख्य उद्देश्य मानते हैं। पिता द्वारा संस्थापित संगठन फ्रेंड्स ऑफ आनंद के माध्यम से आमजनों के बीच अपनी पहचान लगातार बढ़ाते हुए इस संगठन से युवाओं को जोड़ने में लगातार सफलता प्राप्त कर रहे हैं। राजनीति और संगठन के माध्यम से समाज और प्रदेश की भलाई के लिए लगातार आम जनता के बीच अपनी उपस्थिति दर्ज कराते आ रहे हैं।