आला दर्जे के रणनीतिकार हैं वायुसेना प्रमुख बीरेंदर सिंह धनोवा

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भारतीय वायु सेना के 25वें चीफ ऑफ द एयर स्टाफ एयर चीफ मार्शल बीरेंदर सिंह धनोवा चुनौतियों और अल्प संसाधनों के बीच नवोन्मेषी उपायों और कुशल प्रशिक्षण के बल पर फतह पाने का माद्दा रखने वाले हैं। बेहद अनुशासनप्रिय, लक्ष्य के पक्के और देश रक्षा के लिए सदैव तत्पर रहने वाले एसीएम धनोवा की जाम्बाजी कारगिल संघर्ष के दौरान सबने देखी। उनके नेतृत्व में स्क्वैड्रन ने ऊँची पहाड़ियों पर रात में बमबारी के नवोन्मेषी तरीकों का उपयोग किया। उस वक्त धनोवा फ्रंट लाइन ग्राउंड अटैक फाइटर स्क्वैड्रन के कमान अधिकारी भी थे। उनके स्क्वैड्रन को पश्चिम वायु कमान मुख्यालय के सर्वश्रेष्ठ फाइटर स्क्वैड्रन घोषित किया गया। कारगिल संघर्ष के दौरान धनोवा के पराक्रम के लिए उन्हें युद्ध सेवा मेडल और वायु सेना मेडल से नवाजा गया।

जांबाजी, नेतृत्व क्षमता, टीम वर्क और देश प्रेम एसीएम धनोवा को विरासत में मिला है। उनके दादा कैप्टन संत सिंह ब्रिटिश भारतीय सेना में कैप्टन थे और द्वितीय विश्व युद्ध में जापान के खिलाफ लड़े थे। पंजाब के सरदार अजीत सिंह नगर के घरुआँ गाँव में 7 सितंबर, 1957 को जन्मे एसीएम धनोवा के पिता सरायन सिंह एक आईएएस अधिकार थे और अस्सी के दशक में पंजाब सरकार के मुख्य सचिव थे। उन्होंने कुछ साल बिहार सरकार के लिये भी कार्य किया। बाद में वे पंजाब के राज्यपाल के सलाहकार भी नियुक्त हुए। एसीएम धनोवा ने देहरादून के राष्ट्रीय इंडियन मिलिटरी कॉलेज से पढ़ाई की है और राष्ट्रीय रक्षा अकादमी, पुणे से स्नातक किया है। उन्होंने 1992 में वेलिंगटन के डिफेंस सर्विसेज स्टाफ कॉलेज से स्टाफ कोर्स भी किया है।

कई किस्म के युद्धक विमानों की घंटों उड़ानों का अनुभव रखने वाले एसीएम धनोवा को जून, 1978 में भारतीय वायुसेना के युद्धक विभाग में कमीशन मिला था। उन्होंने एचजेटी-16 किरण, मिग-21, सेपेकैट जगुआर,मिग-29 और सु-30एमकेआई जैसे विभिन्न प्रकार के युद्धक जेट उड़ाये हैं और वे एक निपुण उड़ान प्रशिक्षक हैं। अपने 37 वर्ष लंबे सेवाकाल में वे वायुसेना मुख्यालय स्थित टारगेटिंग सेल के निदेशक, पश्चिमी वायु कमान मुख्यालय में फाइटर ऑपरेशन ऐंड वार प्लानिंग विभाग के निदेशक, वायुसेना मुख्यालय में असिस्टेंट चीफ ऑफ एयर स्टाफ (खुफिया), पूर्वी और पश्चिमी वायु कमान के वरिष्ठ एयर स्टाफ अधिकारी और दक्षिण-पश्चिम वायु कमान के एयर ऑफिसर कमांडिंग इन चीफ समेत कई ऑपरेशनल और प्रशासनिक पदों पर रहे। वे डिफेंस सर्विसेज स्टाफ कॉलेज, वेलिंगटन में वरिष्ठ वायु प्रशिक्षक और मुख्य वायु प्रशिक्षक पद पर और विदेश के लिए भारतीय वायुसेना प्रशिक्षण टीम के मुखिया भी रहे। एसीएम धनोवा 1 जून, 2015 को वाइस ऑफ द एयर स्टाफ बने थे।

एयर चीफ मार्शल अरुप राहा की सेवानिवृत्ति के बाद 31 दिसंबर, 2016 को कार्यभार ग्रहण करने वाले एसीएम धनोवा भारतीय वायुसेना के पहले मुखिया हैं जिन्होंने अपने मातहत सभी 12,000 अधिकारियों को व्यक्तिगत रूप से पत्र लिखा (मार्च, 2017 में) है। इस पत्र में उन्होंने अधिकारियों को अत्यंत अल्प सूचना पर अभियान के लिए तैयार रहने को कहा। इस पत्र में एसीएम धनोवा ने वायुसेना में पक्षपातपूर्व रवैये, यौन उत्पीड़न, पेशेवर रवैये के अभाव जैसे वायुसेना की तमाम चुनौतियों की चर्चा की। उन्होंने वायुसेना अधिकारियों से ‘युद्ध में प्रभावी पेशेवर’ बनने को कहा। उन्होंने लिखा कि अपनी और प्रतिद्वंद्वी के नयी प्रौद्योगिक प्रगतियों के प्रति सचेत रहने के अलावा कोई विकल्प नहीं है।

चीफ ऑफ द एयर स्टाफ के रूप में एसीएम धनोवा ने जुलाई, 2017 में फ्रांस का चार दिवसीय दौरा किया। वहाँ उन्होंने फ्रेंच आर्म्ड फोर्सेज के वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों और मिलिटरी एविएशन उद्योग के प्रतिनिधियों से द्विपक्षीय वार्ता की। वे फ्रेंच एयरफोर्स के मुख्यालय, कुछ ऑपरेशनल एयर बेस और भारतीय राफेल पीएमटी भी गये।

एसीएम धनोवा का घर उन्हें मिले तमाम पुरस्कारों से भरा पड़ा है। उन्हें परम विशिष्ट सेवा मेडल (2016), अति विशिष्ट सेवा मेडल (2015), युद्ध सेवा मेडल (1999), वायुसेना मेडल (1999), ऑपरेशन विजय स्टार मेडल, ऑपरेशन पराक्रम मेडल, ऑपरेशन विजय मेडल, सैन्य सेवा मेडल, स्वतंत्रता स्वर्ण जयंती मेडल, 30 वर्षीय दीर्घ सेवा मेडल, 20 वर्षीय दीर्घ सेवा मेडल और 9 वर्षीय दीर्घ सेवा मेडल जैसे सम्मानों से नवाजा जा चुका है। एसीएम धनोवा को 1 अगस्त, 2015 को भारत के राष्ट्रपति का मानद एडीसी भी नियुक्त किया गया। फेम इंडिया एशिया-पोस्ट ने अपने ताजा सर्वे में उन्हें देश के प्रमुख प्रभावशाली नीति निर्माताओं में से पाया है।