राजनीति को नया आयाम देने वाले युगपुरुष हैं अरविंद केजरीवाल

अन्ना आंदोलन की उपज माने जाने वाले अरविंद केजरीवाल की छवि एक ईमानदार, कर्मठ और जनसरोकार से जुड़े राजनेता की रही है. उन्हें मिडल क्लास का प्रतिनिधि माना जाता है और उन्होंने राजनीति की एक नयी परिभाषा गढ़ के देश भर को चौंका दिया. वे आईआईटी से इंजीनियरिंग पास कर आईआरएस अधिकारी बने और फिर पॉलिटिक्स में पढ़े-लिखे लोगों के साथ उतर कर उन्होंने आम आदमी पार्टी बनायी और दिल्ली में सत्ता हासिल की. 

अरविंद केजरीवाल शुरुआत से ही जन सरोकार से जुड़े रहे और नौकरी में रहने के साथ ही 1999 में कुछ लोगों के साथ मिल कर परिवर्तन नाम के एनजीओ की शुरुआत की. 2005 में कबीर नाम की संस्था बनायी जो आरटीआई और सत्ता में जन भागीदारी पर केंद्रित था. 2006 में उन्हें एशिया के नोबेल प्राइज कहे जाने वाले मैगसेसे अवॉर्ड से सम्मानित किया गया. हालांकि उन्होंने इस पुरस्कार में प्राप्त राशि को पब्लिक कॉज नाम के एनजीओ को दान में दे दी. उसी साल उन्होंने नौकरी से इस्तीफा दे दिया और पूरी तरह समजसेवा और भ्रष्टाचार के खिलाफ मुहिम से जुड़ गये. 

2010 में कॉमनवेल्थ घोटाले के खिलाफ आवाज उठायी और 2011 में उन्हें अन्ना हजारे का भी साथ मिला. उन्होंने किरण बेदी के साथ मिल कर इंडिया अगेंस्ट करप्शन बनाया और 2012 में आम आदमी पार्टी का गठन किया जिसने अगले साल हुए दिल्ली के विधानसभा चुनाव में सक्रिय भागीदारी की. हालांकि उन्हें और उनके साथियों को प्रोफेशनल राजनेता नहीं होने का खामियाजा भी भुगतना पड़ा, लेकिन जनता ने उनका भरपूर साथ दिया. 

पहली बार दिसंबर 2013 में जब वे दिल्ली के मुख्यमंत्री बने तो 49 दिनों में ही उन्हें बहुमत साबित न कर पाने के कारण सरकार से इस्तीफा देना पड़ा. तब उन्होंने विपक्षी दल कांग्रेस से समर्थन लेने से इंकार कर दिया था. अगली बार जनता ने उन्हें प्रचंड बहुमत दिया और वे 70 में से 67 सीटें हासिल कर 2015 में दोबारा मुख्यमंत्री बने. 

अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली में स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र में आमूलचूल परिवर्तन कर दिखाया है. सस्ती बिजली-पानी, मोहल्ला क्लीनिक, सरकारी स्कूलों में उम्दा इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे कई कदमों ने दिल्ली की जनता के महानगरीय जीवन को सरल बनाने में काफी योगदान दिया है. राजनीति के छोटे से कार्याकाल में अमिट छाप छोड़ने वाले केजरीवाल से भविष्य में राष्ट्रीय राजनीति को काफी उम्मीदें हैं. 

व्यक्तित्व, रणनीतिक समझ, जिम्मेदारी, पार्टी में प्रभाव, छवि और राजनीतिक दखल आदि मानकों को ध्यान में रख कर किये गये देशव्यापी सर्वे में अरविंद केजरीवाल को धाकड़ नेताओं में अहम स्थान प्राप्त हुआ है.