अक्षय वर्मा: अद्वितीय प्रतिभाशाली नेतृत्व

मुजफ्फरपुर के प्रभात तारा स्कूल से तीसरी कक्षा की पढ़ाई करने वाले अक्षय के बारे में तब शायद किसी ने नहीं सोचा होगा कि यह मासूम सा दिखने वाला बच्चा नई दिल्ली स्थित बंसत कुंज के डीपीएस से स्कूलिंग करने के बाद प्रतिष्ठित संट स्टीफन कालेज से गणित में ग्रेजुएट बनकर उच्च श्क्षिा के लिए वर्ष 2007 में आक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी की ओर रुख करेगा। जहां से फाईनेंसिएल इकॉनोमिक्स में मास्टर डिग्री लेने के दौरान क्रिकेट की ओर झुकाव हुआ और जहां विश्वविद्यालय की क्रिकेट टीम में अक्षय वर्मा का चयन हो गया।

वर्ष 2008 में अक्षय वर्मा लंदन चले गए। जहां लगभग साढ़े तीन वर्षों तक ‘इनवेस्टिंग बैंकिंग’ में नौकरी की। इस बैंकिंग सेवा में अक्षय अपने दौर के सबसे युवा प्रेसिडेंट भी रहे। जून 2011 के करीब वे लोक प्रशासन में मास्टर डिग्री के लिए न्यूयार्क की रवाना हुए, जहां कोलंबिया विश्वविद्यालाय उन्हें मुकाम भी हासिल हुआ। प्रतिष्ठित नौकरी को ठोकर मारकर समाज सेवा में जुट गए और

2012 में ‘अग्रतम’ संस्था के जरिए मछुआरों, किसानों, पशुपालकों, महिलाओं और युवाओं के व्यापक हितों के लिए काम करने में लगे।‘अग्रतम’ के सटीक प्रयास से दरभंगा जिले की बनौली ग्राम पंचायत को 2013 में बिहार सरकार ने पहले निर्मल पंचायत का दर्जा दिया। अक्षय वर्मा वित्तमंत्री अरुण जेटली के बजट कंसलटेंट कमिटी में एग्रिकल्चर के सदस्य भी रह चुके हैं। जलजमाव वाली भूमि मत्यस्य पालन के तौर पर उपयोग करने वाले आइडिया से प्रभावित होकर 2015 में अमेरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने अक्षय वर्मा को ‘कीनीया’ में पुरस्कृत भी किया था।

अनेक डिग्री और पुरस्कार प्राप्त कर चुके अक्षय वर्मा 2014 के लोकसभा चुनाव में ‘शिक्षित सोच, युवा नजरिया’ के साथ पहली बार मुजफ्फरपुर संसदीय निर्वाचन क्षेत्र से अपना किस्मत अजमा चुके हैं। फिलहाल वे ‘सर्वजन कल्याण लोकतांत्रिक पार्टी’ के मंच से राष्ट्रीय महासचिव के रूप में सियासत का खाका खिंचने जुटे हुए हैं। फेम इंडिया एशिया पोस्ट ने अपने ताजा सर्वे में उन्हें बिहार के 40 प्रतिभाशाली युवाओं में पाया है।