नौसेना को अंतरराष्ट्रीय अनुभव से समृद्ध कराया है एडमिरल सुनील लाम्बा ने

sunil Lamba, Admiral , Executive Sunil Lamba, Fame India , Fame India Publication

भारतीय नौसेना के 23वें चीफ ऑफ द नेवल स्टाफ एडमिरल सुनील लाम्बा को समुद्र की लहरों पर सवार हो कर और उसकी गहराइयों में उतर कर देश की सीमाओं रक्षा का लगभग चार दशक लंबा अनुभव है। रणनीति, जज्बे के साथ समन्वय को युद्ध में जीत के लिए जरूरी मानने वाले एडमिरल लाम्बा ने 31 मई, 2016 को चीफ ऑफ द नेवल स्टाफ का पदभार ग्रहण किया था और मई, 2019 तक इस पद पर बने रहेंगे। उन्होंने 29 दिसंबर, 2016 को निवर्तमान वायुसेना अध्यक्ष एयर मार्शल अरुप राहा से चीफ्स ऑफ स्टाफ कमेटी के चेयरमैन का पदभार ग्रहण किया।

नौवहन और दिशा विशेषज्ञ और ऑपरेशनल व स्टाफ अनुभव से समृद्ध सुनील लाम्बा का जन्म 17 जुलाई 1957 को हुआ था। हरियाणा के पलवल जिले के पृथला खंड के अमरपुर गाँव निवासी लांबा के पिता राजेंद्र सिंह लाम्बा द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान सेना के शिक्षा विभाग में कमांडर के पद से रिटायर हुए। बाद में वे सहकारी समितियों के उप रजिस्ट्रार रहे। उनकी माता बिमला लाम्बा फिलहाल दिल्ली में रह रही हैं। सुनील के भाई अनिल भी नौसेना से लेफ्टिनेंट के पद से रिटायर हुए हैं। एडमिरल लाम्बा की पत्नी रीना लाम्बा अध्यापिका हैं।

अजमेर के प्रतिष्ठित मेयो कॉलेज से पढ़ाई करने के बाद उन्होंने राष्ट्रीय रक्षा अकादमी, खड़गवासला से स्नातक किया और फिर डिफेंस सर्विसेज स्टाफ कॉलेज, वेलिंगटन, कॉलेज ऑफ डिफेंस मैनेजमेंट, सिकंदराबाद और रॉयल कॉलेज ऑफ डिफेंस स्टडीज, लंदन से भी शिक्षा ग्रहण की। वे रक्षा एवं प्रबंध अध्ययन में स्नातकोत्तर हैं। वे राष्ट्रीय रक्षा अकादमी में प्रशिक्षण अधिकारी, कॉलेज ऑफ डिफेंस मैनेजमेंट में डायरेक्टिंग स्टाफ, राष्ट्रीय रक्षा कॉलेज में कमांडैंट और पश्चिमी नौसेना कमान की लोकल वर्कअप टीम (पश्चिम) में सी ट्रेनिंग ऑर्गनाइजेशन के फ्लैग ऑफिसर जैसे विभिन्न प्रशिक्षण पदों पर भी रहे। फ्लैग रैंक पर प्रोन्नति होने पर लाम्बा महाराष्ट्र और गुजरात नौसेना क्षेत्र के फ्लैग ऑफिसर कमांडिंग और दक्षिणी नौसेना कमान के चीफ ऑफ स्टाफ रहे। वाइस एडमिरल पद पर प्रोन्नत होने पर वे पूर्वी नौसेना कमान के चीफ ऑफ स्टाफ, दक्षिणी और पश्चिमी नौसेना कमान के फ्लैग ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ, पश्चिमी बेड़े के फ्लीट ऑपरेशन अधिकारी और वाइस चीफ ऑफ नेवल स्टाफ रहे।

नौसेना का माइनस्वीपर बेड़ा हो या एयरक्राफ्ट करियर, सभी तरह के बेड़ों के नौवहन में एडमिरल लाम्बा को महारत है। 1 जनवरी, 1978 को भारतीय नौसेना की एक्जीक्यूटिव शाखा में कमीशन्ड अधिकारी के रूप में शामिल लाम्बा ने पूर्वी और पश्चिमी, दोनों बेड़ों में नौवहन और ऑपरेशन अधिकारी के रूप में सेवा दी है। अपने चार दशक के सेवाकाल में आईएनएस सिंधुदुर्ग (के72) और आईएनएस दूनागिरि (एफ36) के चालक दल पर नौवहन अधिकारी के रूप में काम करने के बाद वे माइनस्वीपर आईएनएस काकिनाडा, फ्रिगेट आईएनएस हिमगिरि (एफ34), आईएनएस रणविजय (डी55) और आईएनएस मुम्बई (डी62) के कमान अधिकारी (सीओ) रहे। उन्होंने एयरक्राफ्ट करियर आईएनएस विराट (आर22) के कार्यकारी अधिकारी और पश्चिमी बेड़े के फ्लीट ऑपरेशन अधिकारी के रूप में भी काम किया।

वे मानते हैं कि कोई एक सेना देश के लिए युद्ध नहीं जीत सकती। इसलिए उनका जोर तीनों सेनाओं के बीच साझा प्रशिक्षण की संख्या बढ़ाने पर है। एडमिरल लाम्बा तीनों सेनाओं का इंटीग्रेटेड सर्विसेज कमांड बनाने की दिशा में सरकार के साथ मिल कर सक्रिय हैं। नौसेना को विभिन्न देशों की नौसेनाओं के अनुभव से समृद्ध करने के लिए एडमिरल लाम्बा चीफ ऑफ नेवल स्टाफ बनने के बाद म्यांमार, श्रीलंका, जापान, यूएई, ओमान, मलेशिया, सिंगापुर, इजराइल, मोजाम्बिक और तंजानिया की यात्रा कर इन देशों के शीर्ष राजनीतिक और सैन्य प्रमुखों से द्विपक्षीय विचार-विमर्श कर चुके हैं। एडमिरल लाम्बा को उनके चार दशक लंबे सेवा काल में परम विशिष्ट सेवा मेडल, अति विशिष्ट सेवा मेडल, स्पेशल सर्विस मेडल, ऑपरेशन पराक्रम मेडल, विदेश सेवा मेडल समेत कई सम्मानों से नवाजा जा चुका है। फेम इंडिया एशिया-पोस्ट ने अपने ताजा सर्वे में उन्हें देश के प्रमुख प्रभावशाली नीति निर्माताओं में से पाया है।