आदित्य शंकर:प्रगतिशील राज्य बनाने का सपना

 

अपनी खुद की पहचान बनाने को आतुर आदित्य शंकर इन दिनों भारतीय जनता युवा मोर्चा के राष्ट्रीय लीगल सेल में बतौर संयोजक काम कर रहे हैं। सपाट एकेडमिक कॅरियर वाले आदित्य केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद के बेटे हैं। बावजूद इसके वे अपनी प्रतिभा के बल पर पहचान बनाने के कायल हैं। शुरुआती पढ़ाई पटना के डॉन बास्को कॉन्वेंट से पूरी करने के बाद आदित्य की स्कूलिंग दिल्ली के सरदार पटेल विद्यालय से की। फिर दिल्ली विश्वविद्यालय के सेंट स्टीफेंस कॉलेज से इतिहास आनर्स में स्नातक बने और वहीं फैकल्टी ऑफ लॉ से कानून की पढ़ाई की।

तत्पश्चात कानून में मास्टर्स की डिग्री के लिए अमेरिका के प्रसिद्ध कॉर्नेल युनिवर्सिटी की ओर रवाना हुए। यहां पढ़ाई के दौरान ही न्यूयार्क सुप्रीम कोर्ट में प्रैक्टिस करने लगे। मगर अपने वतन की याद आने लगी और 2008 में भारत लौटे। इस दौरान सुप्रीम कोर्ट में भारत के पूर्व अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी के साथ जूनियर के रुप में काम करने का मौका मिला। विधिक मामलों में आदित्य की उड़ान यहीं नहीं रुकती। देश-विदेश की अदालतों में वकालत करने वाले आदित्य शंकर इन दिनों इंटरनेशनल लॉ फर्म केडन बरिस के लिए भारत में लिटिगेशन पार्टनर के रूप में काम कर रहे हैं।

बिहार की युवाशक्ति के दम पर देश के दूसरे राज्य आज की तारीख में प्रगति के पथ पर अग्रसर हैं। फिर बिहार अपनी युवाशक्ति का सटीक उपयोग क्यों न करे? इसी सोच को लक्ष्य में रखकर आदित्य शंकर आगे की योजनाओं का खाका खींच रहे हैं। इसी क्रम में राज्य के विकास और युवाओं के रोजगार की समस्या को लेकर आदित्य आर्थिक एवं वैश्विक उत्थान की राह पर ले जाने के लिए तत्पर हैं। यहां की ऊर्जावान युवाशक्ति अपनी मानसिक क्षमता का सदुपयोग कर बिहार को बीमारू राज्य के दर्जे से निकालकर नंबर वन स्टेट बना सकती है। तभी तो आदित्य अपनी इस सोच को प्रोफेशनल अंदाज में ढालकर बिहार को प्रगतिशील राज्य बनाने का सपना पाले हुए हैं। फेम इंडिया एशिया पोस्ट ने अपने ताजा सर्वे में उन्हें बिहार के 40 प्रतिभाशाली युवाओं में पाया है।