स्वच्छ छवि से लोगो की उम्मीदों पर खरी उतरने वाली, अनुप्रिया पटेल

जनता की उम्मीदों पर खरी उतरी हैं अनुप्रिया सिंह पटेल

राजनीति में आना मोदी कैबिनेट की सबसे युवा और तेज-तर्रार नेता अनुप्रिया सिंह पटेल की पसंद नहीं नियति थी. पिता की असमय मृत्यु के बाद पार्टी और लोगों की उम्मीदें दोनों को बचाए रखने के लिए ये राजनीति में उतरीं और तब से आजतक पीछे मुड़ कर कभी नहीं देखा. 31 साल में ये विधायक बनीं और 33 साल में सांसद बन गयीं. अनुप्रिया पटेल उत्तर प्रदेश के मिर्ज़ापुर से अपना दल की सांसद हैं और मोदी मंत्रिमंडल में अनुप्रिया को स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय में राज्यमंत्री बनाया गया है |
28 अप्रैल 1981 को कानपुर में जन्मीं अनुप्रिया ने दिल्ली के श्रीराम लेडी कॉलेज से बीए, एमिटी कॉलेज नोएडा से मनोविज्ञान में एमए और कानपुर यूनिवर्सिटी से एमबीए किया है. राजनीति में आने से पहले ये अध्यापन के क्षेत्र में थीं. अनुप्रिया पटेल के पिता सोनेलाल पटेल यूपी के कद्दावर नेता थे. कुर्मी वोट बैंक पर उनकी अच्छी पकड़ थी. सोनेलाल ने ‘अपना दल’ नाम की पार्टी बनाई थी जिसकी पूर्वांचल में अच्छी पकड़ थी. 2009 में पिता की असमय मृत्यु के बाद अनुप्रिया ने परिवार और पार्टी दोनों को संभाला. उन्होंने पार्टी में महासचिव का पदभार संभाला. 2012 के उत्तर प्रदेश विधान सभा चुनाव में वे चुनावी समर में उतरीं और वाराणसी की रोहिन्यां विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा. इस चुनाव में अनुप्रिया को भारी जन समर्थन मिला और वे विधानसभा की दहलीज़ पार कर गयीं.

2014 के लोकसभा चुनाव में अनुप्रिया ने हवा का रुख भांप बीजेपी से हाथ मिलाया और 2 सीटें जीतकर लोकसभा पहुँच गयीं. बाद में अनुप्रिया ने ‘अपना दल(एस)’ नाम से नयी पार्टी का गठन किया है. लोकसभा में अनुप्रिया पटेल बढ़-चढ़कर अपने क्षेत्र के मुद्दे उठाती रही हैं. इनकी लोकप्रियता को देखते हुए मोदी सरकार में इन्हें जगह दी गयी है.