सोशल मीडिया के माध्यम से लंबे समय से नारी सशक्तिकरण पर आवाज बुलंद करती आ रही हैं गीता यथार्थ

संघर्ष के कई मायने है, कुछ लोग जीवन में संघर्ष, अन्याय को नियति मान स्वीकार कर लेते है, परन्तु कुछ ऐसे होते है जो अपने संघर्षों में अन्य की पीड़ा को भी समझते है और अन्याय के खिलाफ पुरजोर आवाज उठाने में कोई गुरेज नही करते और धीरे धीरे समाज के पीड़ित तबके की आवाज बन जाते हैं। अन्य उससे प्रेरणा पाते हैं और धीरे-धीरे सोसाइटी, समाज, परिवार संकीर्णता से निकलता है और स्वच्छ समाज के निर्माण की प्रक्रिया शुरु होती है। यहाँ हम बात कर रहे हैं देश में नारी सम्मान और सशक्तिकरण के लिये मजबूत हस्ताक्षर बन रही हरियाणा के एक मध्यमवर्गीय परिवार से आने वाली 30 वर्षीय युवा गीता यथार्थ की..गीता यथार्थ वर्तमान में प्रेस इंफोरमेशन ब्यूरो (पीआईबी ), भारत सरकार में कार्यरत है पर वे प्रेरणा बन गयी है देश की महिलाओ के सम्मान में आवाज उठाने को आतुर वर्ग में।

गीता यथार्थ ने आई आई एम सी, नई दिल्ली से मॉस कॉम्युनिकेशन किया है, और एम्. फील, नेट भी है। वे सोशल मीडिया के माध्यम से लंबे समय से नारी सशक्तिकरण पर लगातार आलेख लिखती रही है जिससे प्रभावित हो करीब बीस हजार से ज्यादा लोग इन्हे रोज फेसबुक पर फॉलो करते रहे हैं। परन्तु वे विगत कुछ महीने से अपनी तीन चर्चित मुहिम को कारण बेहद चर्चा में हैं। ये वो मुहिम जिसकी न सिर्फ बहुत चर्चा हुई बल्कि पहली मुहिम ने एमैजॉन जैसी बहुराष्ट्रीय कंपनी को महिला सम्मान से जुड़े प्रॉडक्ट मार्केट से वापस लेने पड़े. इस मुहिम में इनकी अहम भूमिका रही।

दूसरी मुहिम इन्होने अपने फेसबुक अकाउंट से नेचुरल सेल्फी की चलाई.. जिसमें उन्होंने 19 जुलाई को अपनी बिना मेकअप की सेल्फी शेयर की, और #NatutalSelfie का हैशटैग बनाया. और महिलाओं को बिना मेकअप के सेल्फियां शेयर करने के लिये मुहिम भी बहुत बड़ी मुहिम बनी, महिलाओ ने खुद को प्रॉडक्ट मानने से इनकार करके हुये लाखों की संख्या में सोशल साइट्स पर इसका सपोर्ट किया.

कुछ समय पहले, उन्होंने ‘अपनी सड़कें- मेरी रात मेरी सड़क’ के नाम से एक महिलाओं के वजूद से जुड़ी मुहिम की शुरुआत की। फेसबुक पर 8 अगस्त को गीता यथार्थ ने एक फेसबुक पेज ‘अपनी सड़कें- मेरी रात मेरी सड़क’ बनाया और पहली बार 12 अगस्त, शनिवार को देशभर की महिलाओं को रात में शासकों पर उतरकर अपनी मौजूदगी दर्ज करने के लिए कहा जिसके समर्थन में देश के विभिन्न हिस्से से देर रात नारी सम्मान और सामाजिक विचार को बदलाव के लिये हजारों की संख्या में महिला, लड़की, बच्चियां देर रात सड़क पर निकल अपने वजूद को मजबूत करने निकल पड़ीं। इसके अलावा, नारी सशक्तिकरण पर इनके आलेख देश की प्रमुख मैगज़ीन आउटलुक, नवभारत टाइम्स अखबार, प्रमुख वेबसाइट्स जैसे बीबीसी हिंदी, द क्विंट, स्त्रीकाल आदि में प्रकाशित होते रहे हैं।

गीता यथार्थ नारी सशक्तिकरण को अपना जीवन ध्येय मानती है ,ये भारतीय समाज की रुढिवादी सोच से लड़ने को ,नारी सशक्तिकरण के लिये महिलाओं के हक के लिये हर संभव प्रयास कर रही हैं। वे इसके लिए सोशल मीडिया का भरपूर उपयोग कर रही हैं। फेम इंडिया मैगजीन -एशिया पोस्ट सर्वे के 25 प्रभावशाली नारी शक्ति में महिला सशक्तिकरण, नेतृत्व क्षमता, छवि, लगन इत्यादि पॉंच बिंदुओं पर हुये सर्वे में गीता यथार्थ को महिला सशक्तिकरण के लिये इनके मजबूत प्रयासों के कारण प्रमुख स्थान पर माना गया है।