फेम इंडिया मैगजीन एशिया पोस्ट सर्वे के 100 प्रभावशाली बिहारी की सूची में प्रमुख स्थान पर है शिक्षा की अलख जगाने वाले विलक्षण समाजसेवी संत कुमार चौधरी

एक ऐसी शख्सियत, जो नौकरशाही से लेकर शिक्षा, चिकित्सा, कृषि और आईटी आदि तमाम व्यवसायों में सफलता के झंडे गाड़ने के लिये जाने जाते हैं। इस हस्ती का नाम है संत कुमार चौधरी जो आज देश के कई राज्यों में अस्पतालों, कॉलेजों, मेडिकल व इंजीनियरिंग संस्थानों व कृषि शोधशालाओं का सफल संचालन कर रहे हैं।

बिहार में मिथिला की धरती में 5 जनवरी 1959 को जन्मे व पले बढ़े और साइंस से ग्रैजुएशन करने के बाद संत कुमार चौधरी ने देश सेवा के लिये नौकरशाही में जाने का फैसला किया। वे 1983 में तत्कालीन मुख्यमंत्री वसंत राव पाटील के निजी सचिव भी बने। वहां रह कर उन्होंने देखा कि आम आदमी किन-किन समस्याओं से जूझ रहा है। उन्होंने पाया कि सरकार और राजनेता चाह कर भी सभी समस्याओं का समाधान नहीं कर पा रहे क्योंकि सरकारी तंत्र और जनता के बीच कोई कड़ी नहीं है।

उन्होंने देखा कि कोऑपरेटिव सोसाइटियों और स्वयंसेवी संस्थाओं के जरिये जन समस्याओं तक पहुंचा जा सकता है। उन्होंने स्वास्थ्य के क्षेत्र से काम शुरु किया और देश के कई राज्यों में शंकर नेत्रालय की शाखाएं खोलीं। तमिलनाडु, बिहार, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान, झारखंड व ओडिशा आदि राज्यों में काफी लोग लाभान्वित हुए तो उनका उत्साह बढ़ा। उन्होंने पांच ट्रस्ट व सोसाइटियों का गठन किया और उनके जरिये सामान्य शिक्षा, तकनीकी शिक्षा, कृषि शिक्षा और चिकित्सा सुविधाएं आदि का प्रसार किया। बिहार, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, दिल्ली, झारखंड और ओडिशा में उनके दो दर्जन से भी अधिक शिक्षण संस्थान हैं। इनमें से कई संस्थानों में वे गरीब और मेधावी छात्रों को मुफ्त शिक्षा व स्कॉलरशिप भी मुहैया कराते हैं।

हालांकि उन्होंने समाजसेवा को अपना परम ध्येय माना, लेकिन केंद्र व राज्य सरकारों ने उन्हें कई सलाहकार बोर्डों व शैक्षणिक मंडलों में भी शामिल किया। संत कुमार चौधरी देश के करीब आधा दर्जन सरकारी संस्थानों में निदेशक व मैनेजमेंट सदस्य हैं। इसके अलावा वे करीब दर्जन भर सरकारी व अर्ध सरकारी संस्थानों का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। वे 25 संस्थानों के संस्थापक रह चुके हैं और बतौर संपादक कई संस्थानों से पत्र-पत्रिकाएं भी प्रकाशित करते हैं। बिहार, खासकर मिथिला की धरती से उनका विशेष जुड़ाव रहा है और वे मुंबई की प्रतिष्ठित मैथिली मित्र मंडल के पैट्रन भी हैं। इस विभूति को कई दर्जन राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर के पुरस्कार और सम्मान प्राप्त हो चुके हैं जिनका सिलसिला अभी भी जारी है।

अपनी राष्ट्रीय छवि, कार्यक्षेत्र में सफलता, सामाजिक सरोकार, राज्य से जुड़ाव और देश में बड़ा प्रभाव बना कर इन्होंने बिहार का मान देश-दुनिया में बढ़ाया है। उपरोक्त पांच मानदंडों पर एशिया पोस्ट व फेम इंडिया मैगजीन द्वारा किये गये सर्वे में (बिहार से आने वाले) देश के 100 प्रभावशाली व्यक्तियों में इन्हें प्रमुख स्थान पर पाया गया है। टीम फेम इंडिया की तरफ से हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं।