सरल स्वभाव एवं विकासपरक सोच के युवा नेता अभिषेक सिंह

छत्तीसगढ़ के इस युवा नेता की काबिलियत के चर्चे इस कदर हैं कि गुजरात में विधानसभा चुनाव के मद्देनज़र भारतीय जनता युवा मोर्चे ने इनको गुजरात की कमान सौंप दी. इस जिम्मेदारी को अभिषेक ने बाखूबी निभाया, अभिषेक सिंह राजनांदगाँव निर्वाचन क्षेत्र से बीजेपी के सांसद हैं.

5 मार्च 1981 को कवर्धा में जन्मे अभिषेक ने एनआईटी रायपुर से इंजीनियरिंग की है और मशहूर एक्सएलआरआई- ज़ेवियर स्कूल ऑफ़ मैनेजमेंट से एमबीए किया है. अपने पिता छत्तिसगढ़ के मुख्यमंत्री रमन सिंह की मदद करने के लिए ये मुंबई में नौकरी छोड़कर अपने गृह क्षेत्र वापस आ गये. लोकसभा चुनाव लड़ने के 6-7 साल पहले से अभिषेक बीजेपी का गढ़ माने जाने वाले राजनांदगांव और कवर्धा में सक्रिय रहे हैं. 2013 के विधानसभा चुनाव के दौरान ये रमन सिंह के चीफ मैनेजर थे. अपने कुशल नेतृत्व और प्रबंधन के दम पर इन्होंने राजनांदगांव और कवर्धा निर्वाचन क्षेत्रों में बीजेपी का कैंपेन चलाया. इस चुनाव में इन दोनों सीटों पर बीजेपी का प्रदर्शन शानदार रहा , साल 2014 के लोकसभा चुनाव के दौरान बीजेपी जब राजनांदगांव लोकसभा सीट के लिए एक युवा चेहरे की तलाश कर रही थी तो उसकी तलाश अभिषेक सिंह पर आकर रुकी. ‘सरल, सहज, दिल का नेक, राजनंदगांव का बेटा अभिषेक’ नारे के साथ अभिषेक को चुनावी दंगल में उतारा गया. इस नारे ने सीधे-सरल छत्तीसगढ़वासियों के दिल को छुआ और उन्होंने अपने मुख्यमंत्री के बेटे को हाथों हाथ लिया , इस जीत के साथ अभिषेक सिंह 33 साल की उम्र में लोकसभा पहुँचने वाले छत्तीसगढ़ के सबसे युवा सांसद बने. अभिषेक उच्च गुणवत्ता की शिक्षा, युवा सशक्तिकरण और खेलों के विकास पर ध्यान दे रहे हैं. कृषि और ग्रामीण विकास, मानव संसाधन प्रबंधन, शिक्षा, खेल, अंतर्राष्ट्रीय व्यापार और अर्थशास्त्र, ई-शासन और रणनीति, प्राथमिक शिक्षा का प्रचार पर इनका विशेष फोकस है.