संस्कृति के प्रति लगाव और विकास पर दृष्टि रखने वाली नेत्री कलवाकुन्तल कविता

कला और संस्कृति के माध्यम से समाज को एक धागे में पिरोया जा सकता है’, ऐसा करके दिखाया है तेलंगाना से सांसद कलवाकुन्तल कविता ने . अपने प्रदेश की जनता के हक के लिए पूरे दमख़म से अपनी आवाज़ बुलंद करने वालीं के.कविता तेलंगाना से पहली महिला सांसद हैं. वे तेलंगाना राष्ट्र समिति की उम्मीदवार के रूप में निज़ामाबाद लोकसभा सीट से चुनकर पहली बार संसद पहुंची हैं.

13 मार्च को आंध्र प्रदेश के करीमनगर में जन्मीं कलवाकुन्तल कविता की तेलंगाना आन्दोलन में महत्वपूर्ण भूमिका रही है. इनके पिता के. चंद्रशेखर राव तेलंगाना आन्दोलन के नेता और तेलंगाना के पहले मुख्यमंत्री हैं. कंप्यूटर साइंस में बीटेक करने के बाद आगे की पढ़ाई करने के लिए कविता अमेरिका चली गयीं. साल 2004 में कविता अमेरिका से लौटकर तेलंगाना आन्दोलन का हिस्सा बनीं. तेलंगाना के लोगों का अपनी कला और संस्कृति के प्रति लगाव देखकर कविता ने महसूस किया कि कला और संस्कृति ही तेलंगाना के लोगों को एकजुट कर सकती है. इसी से तेलंगाना में सांस्कृतिक पुनर्जागरण का विचार इनके दिमाग में आया और अगस्त 2006 में कविता ने तेलंगाना जाग्रुति नाम के एनजीओ की शुरुआत की. इस संस्था का उद्देश्य सांस्कृतिक विरासत के माध्यम से तेलंगाना के लोगों में गर्व और एकता को जागृत करना था. कविता ने इस संस्था के माध्यम से बतुकम्मा त्योहार एक अहिंसात्मक विरोध के रूप में मनाना शुरू किया ताकि तेलंगाना के लोगों के लिए समानता और न्याय को बढ़ावा मिले. धीरे-धीरे ये त्योहार बड़े स्तर पर आयोजित होने लगा.आज ये त्योहार दुनिया भर के 30 देशों में मनाया जाता है.

कविता के नेतृत्व में युवाओं को रोज़गार मुहैया करवाने के उद्देश्य से तेलंगाना जाग्रुति ने जगह-जगह स्किल ट्रेनिंग सेण्टर खोले. तेलंगाना जाग्रुति की गतिविधियों के अलावा कविता तेलंगाना राष्ट्र समिति और तेलंगाना जेएसी द्वारा आयोजित विभिन्न विरोधों में सक्रिय रही हैं. उन्होंने टी-जेएसी द्वारा आयोजित मिलियन मार्च, रेल रोको, सड़क बंद,चलो विधानसभा आदि आंदोलनों में हिस्सा लिया है. तेलंगाना राज्य आंदोलन के दौरान उन्हें कई बार गिरफ्तार भी किया गया. इनका ये संघर्ष इन्हें जनता के करीब ले आया और 2014 में तेलंगाना राज्य बनने के बाद कविता निज़ामाबाद सीट से रिकॉर्ड मतों से जीतकर संसद पहुँचीं.

के.कविता विभिन्न मजदूर और ट्रेड संगठनों से भी जुड़ी हुई हैं.