राजनीतिक परिस्थितियों में पारंगत कांग्रेस के बेजोड नेता पेमा खांडू

कम उम्र में सियासत में ऊँचा मुकाम हासिल करना आसान नहीं है लेकिन जब राजनीति खून में हो तो असर दिखना लाज़मी है. मात्र 37 साल की उम्र में अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री बने पेमा खांडू एक मंझे हुए राजनीतिकार हैं. ये राजनीति के हर दांव-पेंच से भली भांति वाकिफ हैं, विपरीत परिस्थती को अपने अनुकुल बना लेना कोई आसान बात नहीं है. अपने मुख्यमंत्री काल में पेमा की नेतृत्व क्षमता साफ परिलक्षित होती है. खांडू वर्तमान में देश के सबसे युवा मुख्यमंत्री हैं.

21 अगस्त 1979 में अरुणाचल प्रदेश के तवांग में जन्मे पेमा खांडू अरुणाचल प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और दिग्गज नेता दोरजी खांडू के बेटे हैं. दोरजी की 2011 में एक हेलीकॉप्टर हादसे में मौत हो गई थी. पेमा ने दिल्ली यूनिवर्सिटी के हिंदू कॉलेज से स्नातक किया है. इसके बाद इन्होंने राजनीति की ओर रुख किया और साल 2000 में कांग्रेस से जुड़े.
पेमा की नेतृत्व क्षमता को देखते हुए इनको 2005 में अरुणाचल प्रदेश कांग्रेस कमेटी के सचिव बनाया गया . साल 2011 में पिता की मौत के बाद उनके निर्वाचन क्षेत्र मुक्तो के लिए हुए उपचुनाव में पेमा ने कांग्रेस के उम्मीदवार के रूप में निर्विरोध जीत हासिल की. साल 2014 में भी इन्होंने इस सीट से जीत हासिल की. पेमा खांडू जुलाई, 2016 में कांग्रेस सरकार के मुख्यमंत्री बनने से पहले पर्यटन, शहरी विकास एवं जल संसाधन मंत्री भी रह चुके हैं.

सितम्बर 2016 को पेमा खांडू 43 सत्तापक्ष विधायकों के साथ भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस छोड़कर पीपुल्स पार्टी ऑफ अरुणाचल में शामिल होग गये और भारतीय जनता पार्टी के साथ सरकार बनाई। 31 दिसम्बर 2016 को वह पीपुल्स पार्टी ऑफ अरुणाचल के 33 विधायकों के साथ भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो गए और सरकार का गठन किया.

मोंपा जनजाति से ताल्लुक रखने वाले पेमा खांडू फ़ुटबॉल, क्रिकेट, बैडमिंटन और वॉलीबाल जैसे कई खेलों के शौकीन हैं. वे अपने क्षेत्र में नई प्रतिभाओं की खोज के लिए प्रतियोगिताएं आयोजित करवाते रहते हैं. पेमा अरुणाचल प्रदेश में खेलों को बढ़ावा देने और शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने पर विशेष ध्यान दे रहे हैं. साथ ही सरकारी क्षेत्र के बाहर युवाओं को रोजगार के अवसर मुहैया करवाने के लिए भी प्रयासरत हैं.