रणनीति से राजनीति में अपनी जगह बनाने वाले, प्रशांत किशोर

हाल ही में जनता दल (यूनाइटेड) से जुड़े इमेज बिल्डिंग किंग प्रशांत किशोर उर्फ़ पीके किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं. वे देश के सबसे भरोसेमंद और पॉवरफुल रणनीतिकारों में से एक हैं. 2014 के लोकसभा चुनाव में प्रधानमंत्री मोदी की लकदक 3 डी रैलियों, चाय पर चर्चा, रन फॉर यूनिटी और मंथन जैसे अभियानों के पीछे दिमाग प्रशांत किशोर का था. पीके का साथ पाकर जहाँ मोदी तख़्त तक पहुंचे वहीं पीके जब खिलाफ हुए तो उन्होंने नीतीश कुमार की बिहार में ऐसी आंधी चलाई कि बीजेपी पेड़ के पुराने पत्ते की सी धाराशायी हो गयी.

साल 2011 में बिहार से ताल्लुक रखने वाले प्रशांत किशोर अफ्रीका में यूएन हेल्थ एक्सपर्ट की नौकरी छोड़कर भारत आये और टीम मोदी से जुड़े. उन्होंने राजनीति में ब्रांडिंग के अनूठे प्रयोग द्वारा 2012 के गुजरात विधानसभा चुनाव और 2014 के आम चुनाव में ब्रांड मोदी को मजबूत किया. बिहार में नीतीश कुमार की चुनावी रणनीति बनाने में मदद की जिसके चलते नीतीश कुमार ने अपने विरोधियों पर विजय पायी. प्रशांत किशोर की चमकदार व दमदार रणनीति के चलते पंजाब में कांग्रेस का झंडा बुलंद हुआ | कांग्रेस (वाईएसआर) के प्रमुख जगन मोहन रेड्डी की छवि ने भी पीके का साथ पाकर असर दिखाया.
सितंबर 2018 से प्रशांत किशोर ने जनता दल (यूनाइटेड) के सक्रिय सदस्य के तौर पर अपनी राजनीतिक पारी का आगाज़ किया है. वर्तमान मे प्रशांत जद (यू) के राष्टिय उपाध्यक्ष बनाये गये है | अब इनके सामने चुनौती ये है कि बिहार में जेडीयू को एनडीए के कोटे में ज़्यादा से ज़्यादा सीटें कैसे मिलें और पार्टी के खाते में आईं सीटों पर सफलता कैसे मिले. नीतीश कुमार के विजय रथ को प्रशांत किशोर जैसे सारथी का मिलना कुछ नया रंग अवश्य कायम करेगा , इनके अनुभव का लाभ इनकी पार्टी और राज्य की जनता को मिलेगा , एैसी संभावना तो बनती है |