युवा राजनीति की नयी उम्मीद हैं सचिन पायलट

सचिन पायलट देश के प्रभावशाली युवा नेता हैं. फिलवक्त ये राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष हैं। इन्होने अपनी स्‍कूली शिक्षा नई दिल्‍ली के एयर फ़ोर्स बाल भारती स्‍कूल से तथा नई दिल्‍ली के ही सेंट स्‍टीफ़ेंस कॉलेज से स्‍नातक किया. कॉलेज के बाद इन्होंने बीबीसी के दिल्ली ब्यूरो और जनरल मोटर्स में काम किया. फिर ये अमेरिका चले गये और अमेरिका की पेंसिलवेनिया विश्‍वविद्यालय के व्हार्टन स्कूल से एमबीए की पढ़ाई कर रहे थे तभी दिग्गज राजनेता पिता राजेश पायलट की दुर्घटना में मृत्यु हो गयी. कोर्स के बाद अच्छी-खासी मोटी तनख्वाह पर अमेरिका में ही जॉब मिल जाती लेकिन पिता से करार था कि पढ़ाई के बाद भारत वापस आना है. बेटे ने दिवंगत पिता से किया अपना वादा निभाया. भारत वापस आकर पिता के नक्शेकदम पर चला और छोटी सी उम्र में ही सफलता का वो मुकाम हासिल किया जहाँ तक पहुंचना हर व्यक्ति का सपना होता है. पिता को अपना आदर्श मानने वाले सचिन पायलट ने 10 फरवरी 2004 को राजेश पायलट के जन्मदिन वाले दिन राजनीति में पदार्पण किया.
इसी साल इन्होंने दौसा से लोकसभा चुनाव लड़ा और 14वीं लोकसभा के सबसे युवा सांसद बने. उस समय इनकी आयु मात्र 26 वर्ष थी, . 15 वीं लोकसभा में ये राजस्थान के अजमेर निर्वाचन क्षेत्र से सांसद चुने गये. मनमोहन सिंह के दूसरे कार्यकाल में ये कॉर्पोरेट मामलों के मंत्री भी रहे.
सचिन पायलट का सपना था कि वे अपने पिता और दादाजी की तरह आर्म्ड फ़ोर्सेस से जुड़ें इसलिए ये 6 सितंबर 2012 को क्षेत्रीय सेना में सम्‍मिलित हुए. क्षेत्रीय सेना में ऑफिसर होने के चलते इन्हें ‘लेफ्टिनेंट पायलट’ भी पुकारा जाता है.