बेहतरीन सोच-समझ और मजबूत लेखनी का दम रखने वाले राणा यशवंत फेम इंडिया -एशिया पोस्ट सर्वे की 100 प्रभावशाली की सूची में प्रमुख स्थान पर

मेरे दौर में ये कैसी राज़दारी है, ज़मीन हल्की है हवा भारी है. राणा यशवंत की कलम से निकला ये शेर समय का सच समेटे हुए है. अपनी सोच, समझ और सवालों के लिहाज से भी वे इतने ही सधे और सजग-से हैं. यशवंत जब कभी कुछ कहते हैं लगता है कोई सीधी लकीर खिंचती चली जा रही है. एकदम तरतीब में, मानो पूरी तैयारी से बोल रहे हों, जबकि सच ये है कि वे इसी तरह बोलते हैं. साफ समझ, सधी जुबान.
यशवंत की ऐसी सोच, समझ उनकी गांव की पृष्ठभूमि के कारण ही है और आज भी वे अपने गांव से जुड़े हुए हैं. बिहार के छपरा जिले के रामपुर कलां गांव में पैदा हुए यशवंत को आज टीवी न्यूज इडस्ट्री के नायकों में गिना जाता है. अपनी प्रतिबद्धताओं और प्रतिभा के चलते उन्होंने व्यवस्था और समाज को झकझोरा है. इंडिया न्यूज में बतौर मैनेजिंग एडिटर उन्होंने आसाराम, रामपाल, रामरहीम जैसे पाखंडी बाबाओं के खिलाफ अभियान चलाया तो विदर्भ, मराठवाड़ा, बुंदेलखंड और रुहेलखंड में किसानों की हालत को लेकर सीरीज चलाई. सता-व्यवस्था की सांठगांठ पर बार बार बड़ी बहसों को जरिए हमले करते ही रहते हैं . यशवंत के शो “अर्धसत्य” का असर ये है कि प्रधानमंत्री ने पत्र लिखकर उसकी तारीफ की ,देश में पत्रकारिता के प्रतिष्ठित सम्मान “रेड इंक अव़ॉर्ड” और “अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार सम्मान” भी “अर्धसत्य” को मिल चुका है. इनका मानना हैं कि जो सही है उसको ही आवाज दो , किसी पार्टी या सरकार को सही या गलत साबित करने का ठेका लिए क्यो फिरना ?
आईआईएमसी से 1997 में निकले राणा यशवंत ने “ज़ी न्यूज” से अपने करियर की शुरुआत की और “आजतक” में 9 साल काम किया. “आजतक” में राणा यशवंत ने बतौर आउटपुट हेड कई प्रयोग किेए जिनकी सराहना इंडस्ट्री में हुई. मसलन, आरुषि हत्याकांड पर सीरीज. 2007 क्रिकेट वर्ल्डकप के दौरान क्रिकेट कैफे, करगिल के 10 साल या फिर मुंबई हमला जो हमने देखा.
यशवंत टीवी पत्रकारिता के उन विरले लोगों में हैं जिनकी पकड़ राजनीति और समाज के साथ-साथ साहित्य और संस्कृति पर भी बराबर की है. यशवंत का काव्य संग्रह “अंधेरी गली का चांद” 2016 में आधार प्रकाशन से आया. उनकी कविताओं की तरीफ ज्ञानपीठ पुरस्कार प्राप्त केदारनाथ सिंह से लेकर अरुण कमल, उदय प्रकाश, राजेश जोशी और मंगलेश डबराल जैसे बड़े कवियों ने की है. यशवंत अपनी नज्मों के अलबम पर भी काम कर रहे हैं. हिंदी टीवी पत्रकारिता के जरिए पिछले 20 साल से देश और समाज की हर जरुरी बात रखने-कहनेवाले राणा यशवंत के लिए जीवन का मतलब उसका अर्थवान होना है. चाहे वह सोच हो या फिर साहस. अपनी राष्ट्रीय छवि, कार्यक्षेत्र में सफलता, सामाजिक सरोकार, राज्य से जुड़ाव और देश में बड़ा प्रभाव बना कर इन्होंने बिहार का मान देश-दुनिया में बढ़ाया है। उपरोक्त पांच मानदंडों पर एशिया पोस्ट व फेम इंडिया मैगजीन द्वारा किये गये सर्वे में (बिहार से आने वाले) देश के 100 प्रभावशाली व्यक्तियों में इन्हें प्रमुख स्थान पर पाया गया है। टीम फेम इंडिया की तरफ से हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं।