नरेंद्र के नौ रत्नों में एक ‘प्रभु’

केंद्रीय वाणिज्य मंत्री सुरेश प्रभाकर प्रभु को मोदी मंत्रिमंडल के नवरत्नों में से एक महत्वपूर्ण नगीना कहा जा सकता है। वे जिस भी मंत्रालय में रहे, अपने पूर्ववर्ती मंत्रियों की तुलना में अधिक मेहनती, ईमानदार निष्ठावान मंत्री के तौर पर ख्याति अर्जित करने में कामयाब रहे हैं। इस समय सुरेश प्रभु केंद्र सरकार में वाणिज्य एवं उद्योगमंत्री होने के साथसाथ नागरिक उड्डयन मंत्रालय का कार्यभार भी संभाल रहे हैं

मूल रूप से कोंकण के मालवाड़ से ताल्लुक रखने वाले सुरेश का जन्म 11 जुलाई, 1953 को मुंबई में हुआ था। वे मुंबई में ही पलेबढ़े और उनकी दसवीं तक की पढ़ाई दादर के शारदाश्रम हाईस्कूल से पूरी हुई। इसके बाद उन्होंने विले पार्ले स्थित डहाणुकर कॉलेज से कॉमर्स की डिग्री हासिल की। वाणिज्य की पढाई पूरी करने के बाद उन्होंने न्यू लॉ कॉलेज, मुंबई से कानून की डिग्री भी प्राप्त की। सीए की परीक्षा में प्रभु ने ऑल इंडिया में 11वां रैंक हासिल किया। बाद में उन्होंने बर्लिन की फ़्री यूनिवर्सिटी से पीएचडी भी की। 

राजनीति में प्रवेश से पहले सुरेश प्रभु मुंबई में एक चार्टर्ड अकाउंटेंसी फ़र्म भी चलाते थे पर  1996 में राजनीति में आने के बाद प्रभु ने अपनी सीए फ़र्म बंद कर दी। उनकी पत्नी उमा प्रभु पेशे से पत्रकार हैं पर वे भी कई तरह के सामाजिक कार्यों में व्यस्त रहती हैं। उनका बेटा अमेय भी स्वतंत्र तौर पर कुछ कंपनियां संचालित करता है। 

राजनीति में आना सुरेश प्रभु के लिए एक संयोग ही रहा। बात तब की है जब वे सारस्वत बैंक के चेयरमैन थे और उनका राजनीति से दूरदूर तक कोई वास्ता नहीं था। उनकी ख्याति एक ईमानदार बैंकर के तौर पर फैल रही थी। एक दिन शिवसेना प्रमुख (अब दिवंगत) बाला साहेब ठाकरे ने उन्हें अपने बंगले मातोश्री पर बुलाया और शिवसेना में शामिल होने का प्रस्ताव दिया। सुरेश प्रभु बालासाहेब ठाकरे का अनुरोध नहीं टाल सके। ठाकरे ने प्रभु कोकोंकण की राजापुर लोकसभा सीट से टिकट दिया और 1996 में वे चुनाव भी जीत गये। इसके बाद वे इस क्षेत्र से तीन बार और जीते और कुल लगातार चार बार लोकसभा के लिए चुने गये 

सन् 1999 से 2002 तक के कार्यकाल में सुरेश प्रभु केंद्र सरकार में ऊर्जा मंत्री रहे। बालासाहेब ठाकरे से अंदरूनी विवाद के चलते उन्हें वर्ष 2002 में अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा। हालांकि शिव सेना ने 2009 के लोकसभाचुनाव में उन्हें टिकट दिया लेकिन इस बार सुरेश प्रभु को हार का सामना करना पड़ा। 

2014 में भाजपा की केंद्र में वापसी के बाद रेल मंत्री बनाए जाने से पूर्व प्रभु अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में वे विभिन्न  मंत्रालयों में कार्यरत रहे इस दौरान उन्होंने उद्योग मंत्रालय, पर्यावरण एवं वन मंत्रालय, रसायन एवंउर्वरक मंत्रालय तथा भारी उद्योग एवं सार्वजनिक उद्यम मंत्रालय में अपनी सेवाएं प्रदान कीं 

सुरेश प्रभु के बारे में एक रोचक तथ्य यह है कि लंबे समय से राजनीति में सक्रिय होने के बावजूद उन्होंने अपनी विरोधी पार्टी या प्रतिद्वंदी के बारे में कभी भी कोई आपत्तिजनक बयान नहीं दिया। इसके अलावा धुन के पक्के प्रभु हमेशा अपने कार्य को सर्वोपरि मानते रहे हैं और हर काम को अंजाम तक पहुंचाने की नीति में यकीन रखते हैं। 

सुरेश प्रभु की एक और विशेषता यह है कि वे अपने संसदीय क्षेत्र में सामाजिक कार्यों में बढ़चढ़ कर हिस्सा लेते रहे हैं। प्रभु कई सरकारी और अर्धसरकारी पदों पर रहे हैं। वे कई कंपनियों के बोर्ड के सदस्य और अध्यक्ष भी रहे हैं। प्रभु महाराष्ट्र स्टेट फ़ाइनेंस कमीशन और सारस्वत कोऑपरेटिव बैंक के अध्यक्ष और महाराष्ट्र टूरिज़्म डेवलपमेंट बोर्ड के सदस्य भी रहे हैं। 

वर्तमान में वे अंतरराष्ट्रीय स्तर की 16 संस्थाओं से जुड़े हुए हैं इनमें वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम, वर्ल्ड फेडरेशनऑफ यूनेस्को, यूनाइटेड नेशंस इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट आर्गेनाईजेशन और एशिया एनर्जी फोरम जैसे संगठन शामिल हैं

राजनीतिक कार्यकर्ता होने के साथसाथ सामाजिक कार्यों से भी सरोकार रखने वाले  सुरेश प्रभु एक ग़ैर सरकारी मानव साधन विकास संस्था का भी संचालन करते हैं। इस संस्था का मुख्य उद्देश्य लोगों का  सशक्तिकरण करना  उन्हें आत्मनिर्भर बनाना है। 1998 से यह संस्था लोगों की जीवनशैली को बदलने में काफी अहम भूमिका निभा रही है। यह संस्था आम जरूरतमंद लोगों को आर्थिक, सामाजिक, शारीरिक और  पर्यावरण जैसे मुद्दों के प्रति जागरूक बनाने का काम कर रही है। 

एक चार्टेड एकाउंटेट के तौर पर अपने करियर की शुरुआत करने वाले सुरेश प्रभु उसूलों के इतने पक्के हैं कि लगभग डेढ़ दशक पूर्व उन्होंने अटल बिहारी वाजपेयी सरकार से हटना मंज़ूर किया था, लेकिन तब की अपनी पुरानी पार्टी शिवसेना द्वारा भाजपा पर दबाव बनाने के निर्देशों का पालन करने से इंकार कर दिया था। शिवसेना से राजनीतिक करियर शुरू करने के बावजूद उसके नेतृत्व से अपने मतभेदों के जारी रहने के कारण अंततः 9 नवंबर 2014 को उन्होंने यह नाता तोड़ दिया और भाजपा में शामिल हो गये। 

2014 में वर्तमान मोदी सरकार के केंद्र में सत्ता के आने के बाद जब उनका नाता शिवसेना से टूटा तब भाजपा ने उन्हें हरियाणा से राज्यसभा का सदस्य मनोनीत किया दो साल का यह कार्यकाल समाप्त होने के बाद 2016 में वे आंध्र प्रदेश से भाजपा के राज्यसभा सांसद चुने गये। शिवसेना में रहते हुए वे चार बार राजापुर लोकसभा सीट से सांसद रहे। 

सुरेश प्रभु की प्रतिभा और दायित्वों को पूरा करने की गहरी लगन को देखते हुए ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शासन सँभालने के बाद 2014 में उन्हें रेलवे जैसा अहम मंत्रालय सौंपा। वे प्रधानमंत्री के इस भरोसे और कसौटी पर काफ़ी हद तक खरे उतरे। खासतौर पर पारदर्शिता,   कैटरिंग, गो इंडिया स्मार्ट कार्ड जैसे कई कदम उन्होंने रेलवे में लागू करवाये।  इनका मकसद रेल यात्रा को आम आदमी के लिए और आसान बनाना था। 

कई तरह की समस्याओं से घिरे रेलवे के सामने मौजूदा चुनौतियों और समस्याओं से निबटने हेतु विभागीय अधिकारियों पर निर्भर रहने के बजाय उन्होंने खुद कई बार लोकल ट्रेन का सफर किया। इससे उन्हें और बेहतर अंदाजा हुआ कि यात्रियों की दिक्कतें क्या हैं और कहांकहां किसकिस तरह के सुधारों की ज़रूरत है।  

सुरेश प्रभु मौजूदा सरकार के सामने मौजूद नये दौर की नई और कई चुनौतियों के मद्देनज़र बाखूबी अपना दायित्व निभा रहे हैं। हाल ही में उन्होंने यह आशा जताई है कि देश की आर्थिक वृद्धि दर अगले साल 8 प्रतिशत पार कर सकती है। अपने मंत्रालय और सरकार के कामकाज के प्रति वे पूरी तरह आश्वस्त हैं। 

वे इस बात के प्रति भी आशावान हैं कि देश की अर्थव्यवस्था के आकार को दोगुना कर 5000 अरब डॉलर तक पहुंचाने के लिए नई औद्योगिक नीति बनाने समेत कई और ज़रूरी कदम उठाए जाएं तो सार्थक परिणाम निकल सकते हैं। गौरतलब है कि वर्ष 2018 में जनवरी से मार्च की पहली तिमाही में देश की जीडीपी (सकल घरेलूउत्पाद) की वृद्धि दर 77 फीसदी रही है। 

चार्टेड एकांउटेंट जैसे शानदार करियर को छोड़कर राजनीति में आए सुरेश प्रभु  अपनी कैबिनेट के साथियों के बीच काफी लोकप्रिय हैं। इसका अंदाज़ा इस बात से लगाया जा सकता है कि उनके इस्तीफ़ा देने के बाद रेलवे मंत्रालय का कार्यभार संभालते वक्त मौजूदा रेल मंत्री पीयूष गोयल ने उन्हें अपने राजनीतिक करियर के मार्गदर्शक की संज्ञा दी और बताया कि जब भी उन्हें सुरेश प्रभु के साथ काम करने का मौका मिला, उन्होंने उनका ख़ास ध्यान रखा

गौरतलब है कि सुरेश प्रभु ने रेलवे के कुछ भीषण हादसों के कारण नैतिक आधार पर रेल मंत्रालय से त्यागपत्र दिया लेकिन प्रधानमंत्री मोदी ने उनकी प्रतिभा को अन्यत्र इस्तेमाल करने का फ़ैसला करते हुए उन्हें केन्द्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय का कार्यभार सौंपा। तबसे प्रभु वहीं पर कार्यरत हैं।

पीयूष गोयल के शब्दों मेंसुरेश प्रभु जब कार्यबल के प्रमुख थे, तब वे सरकार मेंनिर्बाध कार्य संस्कृतिअपनाते थे। अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में उन्होंने मेरे पिता (स्व. वेद प्रकाश गोयलजहाज़रानी मंत्री) के साथ बतौर कैबिनेट सहयोगी काम किया। उस समय ऊर्जा मंत्रालय संभाल रहे सुरेश प्रभु ने जिस नेतृत्व क्षमता का प्रदर्शन किया, उसी की बदौलत आज हमारा देश ऊर्जा के क्षेत्र में इतना समर्थ बन सका है।  उल्लेखनीय है कि उस दौरान सुरेश प्रभु नदियों को जोड़ने वाले कार्यबल के प्रमुख भी थे। 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जब सुरेश प्रभु को रेल मंत्रालय जैसा महत्वपूर्ण विभाग सौंपा तब महाराष्ट्र विधानसभाचुनाव के समय से भाजपा से गहरे तौर पर नाराज़ शिवसेना ने साफ़ कह दिया था कि यदि सुरेश प्रभु को भाजपा कोई मंत्रालय देती है तो इसे शिवसेना के कोटे से नहीं माना जायेगा। सुरेश प्रभु मई, 2014 में केंद्र  में भाजपा की सरकार बनने के समय शिवसेना में ही थे ऐसे हालात में भाजपा ने सुरेश प्रभु पर अपना पूरा विश्वास कायम रखते हुए उन्हें हरियाणा से राज्यसभा में भेजा और रेलवे जैसे अहम मंत्रालय की ज़िम्मेवारी उनके कंधों पर डाली। 26 फरवरी, 2015 को रेल मंत्री सुरेश प्रभु ने नरेंद्र मोदी सरकार की ओर से पहला पूर्ण रेल बजट पेश किया और रेलवे मंत्रालय के सामने मौजूद आधुनिक दौर की चुनौतियों तथा भविष्य की ज़रूरतों को ध्यान में रखते हुए अपने विजन का खाका सामने रखा

अपने रेल मंत्री पद के कार्यकाल के दौरान सुरेश प्रभु रेलवे को हाइटेक बनाने के प्रयोग के कारण भी काफी चर्चित रहे। ऐसा ही एक किस्सा उनकी संवेदनशीलता और तुरंत कार्रवाई करने के कारण ना केवल यादगार है बल्कि मंत्रियों के लिए एक मिसाल भी है  वाकया यह रहा कि रेल में सफ़र के दौरान एक यात्री ने अपने बच्चे के इलाज के लिए सुरेश प्रभु को ट्वीट किया। ट्वीट के कुछ देर बाद ही रेलवे के अफ़सर और डॉक्टर कोच में आ पहुंचे। बच्चे को तुरंत चिकित्सीय सहायता प्रदान की गयी। सुरेश प्रभु के कार्यकाल के दौरान ऐसे अन्य कई किस्से मीडिया की सुर्खियां बने और यात्रियों के दिलो-दिमाग पर अपनी छाप छोड़ गये।

2017 में केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग तथा नागरिक उड्डयन मंत्रालय संभालने के बाद से वे वाणिज्य से जुड़े मुद्दोंऔर मसलों पर अपने द्वारा अर्जित ज्ञान का भरपूर उपयोग कर रहे हैं अपनी इस प्रतिभा का इस्तेमाल करते हुए सुरेश प्रभु देशविदेश में कई कल्याणकारी योजनाओं के संचालन और सम्मेलनों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं

दिसंबर, 2017 में सुरेश प्रभु ने अर्जेंटीना के ब्यूनस आयर्स में आयोजित हुए विश्व व्यापार संगठन के मंत्री स्तरीय सम्मेलन के दौरान कई द्विपक्षीय बैठकों में भाग लिया। इस दौरान उन्होंने अर्जेंटीना के राष्ट्रपति से द्विपक्षीय सहयोग के व्यापक विषयों पर विचार विमर्श किया। इसके  अलावा उन्होंने अर्जेंटीना के विदेश मंत्री से भी मुलाकात की ताकि दोनों देशों के बीच राजनैतिक, आर्थिक, वैज्ञानिक और प्रौद्योगिकी पर चर्चाएं सार्थक दिशा में आगे बढ़ सकें।

प्रभु ने स्विटज़रलैंड के आर्थिक मामलों तथा शिक्षा और अनुसंधान मंत्री से भी मुलाकात की। दोनों मंत्रियों ने द्विपक्षीय संबंधों और भारतइफ़्टा (IFTA- इंटरनेशनल फ़ेडरेशन ऑफ़ टेक्निकल एनालिस्ट्स) के बीच हुए समझौते पर विचार विमर्श किया। 

सुरेश प्रभु ने विश्व व्यापार संगठन संबंधी सम्मेलन के दौरान व्यापार मंच में भी भाग लिया। चर्चा के दौरान भारत के लोगों के लिए खाद्य और पोषण सुरक्षा के विषय पर प्रभु द्वारा दिए गए भाषण की अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर काफी  सराहना हुई।  

अप्रैल, 2018 में सुरेश प्रभु ने कॉमर्स पर राष्ट्रीय नीति बनाने के लिए आयोजित हुई थिंक टैंक की पहली बैठक की अध्यक्षता की। कॉमर्स पर राष्ट्रीय नीति की  संरचना करने के उद्देश्य से  थिंक टैंक की स्थापना श्री प्रभु के नेतृत्व में हाल ही में वाणिज्य विभाग द्वारा की गयी है। यह समावेशी तथा तथ्य आधारित संवाद के लिए एक विश्वसनीय मंच उपलब्ध कराएगा। 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की एक  अहम परियोजना स्टार्टअप इंडिया को लेकर सुरेश  प्रभु विशेष तौर पर गंभीर रहे हैं। इस दिशा में उनके द्वारा अब तक किए गए काम की काफी सराहना हुई है और इससे लोगों को स्वरोज़गारका मौका तो मिला ही, यह नए उद्यमी अन्य नागरिकों को भी रोज़गार मुहैया करने में कामयाब रहे 

सुरेश प्रभु लागत में कमी और उत्पाद की गुणवत्ता में वृद्धि के हमेशा से पक्षधर रहे हैं। भारतीय सनदी लेखाकार संस्थान द्वारा आयोजित एक  सम्मेलन में उन्होंने  इस काम में लेखाकारों की अहम भूमिका को रेखांकित करते हुए कई उपयोगी सुझाव दिये।      

अप्रैल 2018 में उनकी अगुवाई में एक महत्वपूर्ण प्रयास का आरंभ हुआ गोवा को कार्गो हब के रूप में विकसित करना। सुरेश प्रभु ने डाबोलिम हवाई अड्डे पर मीडिया को संबोधित करते हुए यह स्पष्ट कर दिया कि केंद्र सरकार राज्य सरकार तथा निजी सहयोगियों के माध्यम से गोवा को एक पर्यटन स्थल तथा कार्गो हब के रूप में विकसित करने का प्रयास कर रही है। 

इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत मोपा हवाई अड्डे का संचालन सितंबर, 2020 से शुरू हो जायेगा। डाबोलिमहवाई अड्डे पर भी 300 करोड़ रुपये की लागत से पुनरुद्धार मरम्मत का काम तेजी से चल रहा है। उनके इन प्रयासों से प्रभावित हो कर सिंगापुर एयरलाइंस और लुफ्थांसा एयरलाइंस जैसी बड़ी हवाई कंपनियां भी  भारत में गंतव्य बाजार का हिस्सा बनने में रुचि दिखा रही हैं।

सुरेश प्रभु का मानना है कि कार्गो परिवहन के माध्यम से किसानों की अंतर्राष्ट्रीय बाजार तक पहुंच बनेगी औ रगोवा में दो हवाई अड्डों के संचालन से यात्रियों की संचालन क्षमता में तीन गुनी वृद्धि होगी। उन्हें यह भी आशा है कि इस योजना के मूर्त रूप लेने से नागरिक विमानन मंत्रालय तथा अन्य संबंधित क्षेत्रों में पढ़ेलिखे नौजवानों के लिए नौकरियों की अपार संभावनाओं पैदा होंगी तथा राज्य का समग्र विकास भी मुमकिन हो सकेगा।

यह सुरेश प्रभु और उनके जैसे कई दिग्गज नेताओं के कारण ही संभव हो पाया है कि केंद्र सरकार सुचारु रूप से काम करते हुए अपने द्वारा तय लक्ष्यों को हासिल करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है परदे के पीछे कामकर रहे ऐसे ही  समर्पित मंत्रियों की बदौलत भारत आज तेजी से एक विश्व शक्ति के रूप में उभर रहा है सुरेश प्रभु ऐसे ही एक नेता हैं बल्कि यह कहा जाये कि समर्पित कार्यकर्ता, सच्चे अर्थों में कर्म के सिपाही हैं।

” मंत्री नंबर-1 वर्ष 2018″ में फेम इंडिया ने एशिया पोस्ट के साथ मिलकर मंत्रियों की छवि, उनका प्रभाव, विभाग की समझ, लोकप्रियता, दूरदर्शिता और परिणाम जैसे कुल 10 बिंदुओं पर केंद्र सरकार के मंत्रियों का आकलन किया और उनमें उपरोक्त आकलन में सुरेश प्रभु “कर्मयोद्धा” कैटगरी में सर्वश्रेष्ठ स्थान पर हैं.