जनता की सेवा कर समाज और राजनीती में अपनी जगह बनाने वाले हरिंदर पाल सिंह चंदूमाजरा

पंजाब में विपक्ष का प्रभावी चेहरा हैं हरिंदर पाल सिंह चंदूमाजरा

जनता की समस्याओं को समझकर उनको दूर करने का हरसंभव प्रयास करना एक नेता का कर्तव्य होता है. इस कर्तव्य को ही अपने जीवन का उद्देश्य बना लिया है पंजाब की सनौर विधानसभा सीट से विधायक हरिंदर पाल सिंह चंदूमाजरा ने. इसी के चलते हरिंदर पाल ने मात्र 38 साल की उम्र में पंजाब में प्रभावशाली युवा नेता के रूप में अपनी पहचान बनाई है.

28 फरवरी 1980 को पटियाला के चंदूमाजरा गाँव में जन्मे हरिंदर पाल सिंह के लिए उनका गाँव ही उनकी पहचान है. पेशे से इंजिनियर हरिंदर पाल ने क़ानून की पढ़ाई भी की है. ये पंजाब सहकारी आन्दोलन से नेता के रूप में उभरे और अपने गांव के सहकारी समिति के अध्यक्ष बने. इसके बाद कई स्थापित नेताओं को हराकर सेंट्रल कॉपरेटिव बैंक, पटियाला के मैनेजिंग डायरेक्टर बने. अब तक हरिंदर पाल पटियाला की राजनीति में अपना वर्चस्व स्थापित कर चुके थे.

इनकी काबिलियत को देखते हुए पंजाब विधानसभा चुनाव 2017 के चंद महीनों पहले शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने इन्हें पंजाब की सनौर विधानसभा सीट का इंचार्ज बना दिया. सनौर वही सीट थी जिससे चुनकर साल 1985 में इनके पिता प्रो. प्रेम सिंह चंदूमाजरा पहली बार पंजाब विधानसभा पहुंचे थे. इस सीट पर पिछले कई सालों से कांग्रेस का कब्ज़ा था और सनौर पर वापस अकाली दल का परचम लहराना हरिंदर के सामने सबसे बड़ी चुनौती था. वक़्त कम था और ज़िम्मेदारी बड़ी लेकिन हरिंदर पाल ने हार नहीं मानी. वे सनौर की जनता की सेवा करने में जी-जान से जुट गये.सनौर की जनता के बीच हरिंदर पाल सिंह चंदूमाजरा की लोकप्रियता बढ़ते देख अकाली दल ने विधानसभा चुनाव में इन्हें इस सीट से उम्मीदवार घोषित कर दिया. सनौर की जनता ने हरिंदर पाल सिंह को हाथों-हाथ लिया और ये पहली बार पंजाब विधानसभा पहुंचे.

वर्तमान ने हरिंदर पाल सिंह पंजाब विधानसभा में विरोधी दल के सक्रिय सदस्य हैं. जनता के बीच इनकी पहचान एक जुझारू नेता के रूप में है. ये निर्भीक होकर जनता के हक़ की आवाज़ बुलंद करते नज़र आते हैं.