छोटी उम्र के बड़े जननेता हैं हार्दिक पटेल

केवल 22 साल की उम्र में गुजरात सरकार की नींद उड़ा देने वाले इस युवा नेता को 3 साल पहले तक कोई नहीं जानता था. जुलाई 2015 में पटेल आरक्षण को लेकर गुजरात के महेसाणा में आयोजित एक छोटी-सी रैली को इस युवा ने इतने बड़े आन्दोलन का रूप दे दिया कि गुजरात की राजनीति हिल गयी. ये आन्दोलन पटेल समाज, शिक्षा और सरकारी नौकरियों में आरक्षण की मांग को लेकर कर रहा था. एक के बाद एक ताबड़तोड़ रैलियों में उमड़े जन सैलाब ने इस युवा को अपना नेता मान लिया. गुजरात सरकार की ईंट से ईंट बजा देने वाले इस युवा नेता का नाम है हार्दिक पटेल.

अहमदाबाद चंद्रनगर गांव में रहने वाले हार्दिक पटेल कॉमर्स से स्नातक हैं. उनका जन्म 20 जुलाई 1993 को एक मध्यमवर्गीय परिवार में हुआ था. हार्दिक ने पाटीदारआंदोलन की शुरुआत तब की जब खुद वो इसका शिकार बने. हार्दिक ने जब युवाओं की बात को मंच पर उठाना शुरू किया तो उन्हें मंझे हुए नेताओं ने तवज्जो नहीं दी, लेकिन हार्दिक को पता था कि उन्होंने जिस बात को छेड़ा है वह उनके समाज के तार को जरूर छुएगी, हुआ भी वही महज एक साल के अंदर हार्दिक पटेल का नाम हर पटेल की जुबान पर चढ़ गया खासकर युवाओं के। इस युवा पाटीदार नेता का उद्देश विरोध की नहीं समाधान की राजनीति करना है और इसी दिशा में वे लड़ाई लड़ रहे हैं. फिलहाल हार्दिक पटेल किसानों की समस्याओं और अधिकारों की लड़ाई लड़ने की रणनीति बनाने में व्यस्त हैं.हार्दिक पटेल अब गुजरात से बाहर निकलकर विभिन्न आंदोलनों का हिस्सा बन रहे हैं. उन्होंने गुजरात के कुछ इलाकों में युवा संवाद का कार्यक्रम भी शुरू किया है।