चुनाव प्रबंधक से मिनिस्टर बनने का अद्भुत सफर

अपनी स्पष्टवादिता और जनसुलभता के लिए मशहूर कॉनराड कोंगकल संगमा मेघालय के नवनिर्वाचित मुख्यमंत्री हैं. मेघालय पर पिछले 10 सालों से कांग्रेस का वर्चस्व था. ये कॉनराड संगमा की मेहनत का ही नतीजा है कि यहाँ 2018 में हुए असेंबली इलेक्शन में नेशनल पीपल्स पार्टी (एनपीपी) जिसकी नींव इनके पिता पी.ए. संगमा ने रखी थी, दूसरी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है. संगमा ने भारतीय जनता पार्टी सहित कई पार्टी और विधायको को जोड़ कर मेघालय में अपनी सरकार बनाई है.

27 जनवरी 1978 को दक्षिण गारो हिल्स का हिस्सा तुरा में पैदा हुए संगमा की प्रारंभिक शिक्षा सेंट कोलम्बस विद्यालय, नई दिल्ली से तथा उच्च शिक्षा लंदन विश्वविद्यालय तथा पेन्सिल्वेनिया विश्वविद्यालय से हुई है. कॉनराड संगमा ने पिता स्व. पीए संगमा से राजनीति की बारीकियां सीखीं और पढ़ाई पूरी करने के बाद 1990 के दशक में अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत की. उस वक़्त ये अपने पिता पीए संगमा के चुनाव प्रबंधक थे. साल 2008 में ये मेघालय विधानसभा पहुंचे. इसी साल संगमा ने राज्य सरकार की कैबिनेट में पॉवर, फाइनेंस और टूरिज्म जैसे महत्वपूर्व मंत्रालयों को संभाला. ये मेघालय के सबसे युवा फाइनेंस मिनिस्टर बने. इनकी काबिलियत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इन्होंने मंत्री बनने के मात्र 10 दिनों के भीतर राज्य का वार्षिक बजट पेश कर दिया था. साल 2009 से 2013 तक संगमा नेता विपक्ष की भूमिका में रहे. साल 2016 में पिता की मृत्यु के बाद ये अपने परिवार की पारंपरिक लोकसभा सीट तुरा से सांसद बने और एनपीपी की कमान इनके हाथों में आ गयी.

कॉनराड कोंगकल संगमा पिता की विरासत को आगे बढ़ाना चाहते हैं. वे अपनी पार्टी की शाखाएं पूर्वोत्तर के सभी राज्यों में फैलाने में लगे हुए हैं. अभी एनपीपी केवल मेघालय, मणिपुर और नागालैंड में है. संगमा अपनी पहचान पूरे पूर्वोत्तर के नेता के रूप में बनाना चाहते हैं.

राजनीति के अलावा संगमा सामजिक कार्यो में भी सक्रिय हैं. ये पीए संगमा फाउंडेशन के अध्यक्ष हैं, जो शिक्षा क्षेत्र और पर्यावरण क्षेत्र से जुड़ी है और मेघालय के ग्रामीण इलाकों में चार कॉलेज चलाती है.