मैथिली और भोजपुरी और मगही संगीत को सम्मान व प्रसिद्धि दिलानेवाली लोक गायिका शारदा सिन्हा

मैथिली और भोजपुरी और मगही संगीत को सम्मान व प्रसिद्धि दिलानेवाली लोक गायिका शारदा सिन्हा को बिहार कोकिला की उपाधि प्राप्त है,  इन्होंने अपनी मधुर आवाज से लोक संगीत की गरिमा और सांस्कृतिक महत्व को दुनिया भर में एक नयी ऊंचाई दिलायी है. 9 अक्टूबर 1952 को बिहार के समस्तीपुर में जन्मी शारदा सिन्हा ने सबसे पहले पंचायती घराना के स्व. पंडित रघु झा से भारतीय क्लासिक संगीत का प्रशिक्षण प्राप्त किया.ठुमरी और दादरा की शिक्षा इन्हें स्व. सीताराम हरी दांडेकर और पन्ना देवी से मिली.

इनके लोक गायकी के प्रशंसक पूरी दुनिया में फैले हुए है,  जिनमें रूस,  चाइना, यु के,  यु एस ए, मॉरिशस,  सूरीनाम, जर्मनी,  बेल्जियम,  हॉलैंड आदि देश के लोग शामिल है.हिंदी सिनेमा में इनके गए कई लोक गीत जैसे “कहे तोसे सजना” – फिल्म -मैंने प्यार किया ( सलमान खान की पहली फिल्म ),  “तार बिजली” – फिल्म -गैंग्स ऑफ़ वासेपुर,  “कौन सी नगरिया” बहुत लोकप्रिय है. बिहार के सबसे पवित्र त्यौहार – छठ पर्व इनके लोक गीतों के बिना अधुरा है. इन्हें बिहार का सांस्कृतिक ऐम्बेसेडर मानना एक सही उदाहरण माना जाता है क्योंकि ये बिहार के लोक संगीत की मिठास, सांस्कृतिक उत्कृष्टता को लोगों के बीच ले जाने में  बड़ी भूमिका निभा रही हैं. देश विदेश में शारदा जी को लोकगायिकी के कई उत्कृष्ट सम्मान समय-समय पर प्राप्त हुए हैं जिनमें लोक कलाश्री, बिहार गौरव,  लोक रत्न,  भिखारी ठाकुर सम्मान,  .राष्ट्रीय अहिल्या देवी सम्मान,  संगीत नाटक अकेडमी अवार्ड प्रमुख है. इन अवार्ड व सम्मानों के साथ ही इन्हें  लोकगायकी के लिए देश के सबसे बड़े सम्मान “पद्म श्री” से सम्मानित किया गया है. वर्तमान में ये कला संस्कृति के उत्थान से जुड़ी कई सरकारी व गैर सरकारी संस्थानों के साथ मिल कर देश भर में लोकसंगीत के क्षेत्र में कई अभिनव कार्य कर रही हैं.

एशिया पोस्ट – फेम इंडिया के 100  प्रभावशाली व्यक्तियों के सर्वे में प्रसिद्ध लोक गायिका शारदा सिन्हा प्रमुख स्थान पर हैं.