उम्मीद बरकरार है कन्हैया कुमार से

क्रांतिकारी विचारों से ओतप्रोत युवा चेहरे कन्हैया कुमार में भारतीय राजनीति के भविष्य की संभावनाए छुपी है. जेएनयू छात्र संगठन के पूर्व अध्यक्ष कन्हैया कुमार एक प्रखर वक्ता हैं. जब ये अपनी शैली में भाषण देते हैं तो क्या युवा क्या वृद्ध सब इनको सुनने के लिए मजबूर हो जाते हैं.

जनवरी 1987 में बिहार के बेगुसराय के बीहट गाँव में जन्मे कन्हैया कुमार बचपन से ही मेधावी छात्र रहे हैं. इनकी प्रारम्भिक पढ़ाई बरौनी के आरकेसी हाई स्कूल में हुई. अपने स्कूल दिनों में, ये अभिनय में रुचि रखते थे और इंडियन पीपल्स थियेटर एसोसिएशन के सक्रिय सदस्य थे. 2002 में कन्हैया ने पटना के कॉलेज ऑफ कॉमर्स में दाखिला लिया और भूगोल से स्नातक में प्रथम श्रेणी प्राप्त की. यहीं से उनकी छात्र राजनीति की शुरुआत हुई । नालंदा ओपन यूनिवर्सिटी से सोशियोलॉजी में पोस्ट ग्रेजुएशन करने के बाद, कन्हैया ने जेएनयू (दिल्ली) में अफ्रीकन स्टडीज में पीएचडी के लिए एडमिशन ले लिया। कन्हैया कुमार ऑल इंडिया स्टूडेंट फेडरेशन के ऐसे पहले सदस्य बने जो जेएनयू में छात्र संघ के अध्यक्ष पद के लिए चुने गए।

अक्टूबर 2016 में कन्हैया कुमार की आत्मकथा ‘बिहार टू तिहाड़’: माय पॉलिटिकल जर्नी’ प्रकाशित हुई है. इस किताब में उन्होंने बिहार के गाँव में बीते अपने बचपन से लेकर पटना के कॉलेज के दिनों और दिल्ली में आकर राजनीतिक सफ़र की शुरुआत का वर्णन किया है. 29 अप्रैल 2018 को, कन्हैया कुमार भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी की 125 सदस्यीय केन्द्रीय परिषद के लिए चुने गए हैं.